बनाना था म्यूजियम, बना दी लाइब्रेरी
ग्वालियरमें मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान का पहला एग्रीकल्चर म्यूजियम बनाने के लिए केंद्र सरकार से मिले एक करोड़ रुपए से अधिकारियों ने एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी बना दी है। इस म्यूजियम में पुरातन काल से लेकर कृषि के आधुनिक तौर-तरीके समझाने के लिए यहां कृषि से संबंधित उपकरण खेती-किसानी के तरीकों को प्रदर्शित करना था, लेकिन जरूरी संधाधनों की व्यवस्था नहीं होने के कारण अफसरों ने म्यूजियम के लिए बने भवन में लाइब्रेरी शिफ्ट कर दी है। ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने एग्रीकल्चर साइंस म्यूजियम बनाने में इतनी जल्दबाजी दिखाई कि बजट का ध्यान ही नहीं रखा गया। आईसीआर से मिले बजट को आनन-फानन में ठिकाने लगा दिया गया, लेकिन म्यूजियम कैसे बनेगा, इसकी प्लानिंग नहीं की गई।
म्यूजियम शुरू करने के लिए पांच करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसे आदिम जाति कल्याण विभाग को भी भेजा गया है, लेकिन विभाग ने इस प्रस्ताव पर किसी प्रकार की रुचि नहीं दिखाई है। अब तो यूनिवर्सिटी के पास बजट है और ही कोई बजट स्वीकृत कर रहा है। ऐसे में म्यूजियम कैसे बनेगा, इसका जवाब यूनिवर्सिटी के अफसरों के पास भी नहीं है। दूसरी ओर विवि के संचालक का कहना है कि भवन तो एक करोड़ रुपए में बन गया है, बजट के अभाव में अन्य जरूरी काम दो साल से रुके हुए हैं। बजट मंजूरी के लिए छह करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा है।
म्यूजियम बनाने पर नहीं दिया ध्यान
म्यूजियमशुरू होने के कारण यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने बिल्डिंग में लाइब्रेरी शुरू कर दी। अब अधिकारियों का कहना है कि भवन तैयार हाेते ही लाइब्रेरी को वहां शिफ्ट कर दिया जाएगा।
छात्र कर सकते थे रिसर्च
कृषिविषय के छात्र इस म्यूजियम के बनने से रिसर्च कर सकते थे। यहां कृषि विज्ञान की बेहतरीन किताबों से लेकर आधुनिक रिसर्च भी देखने को मिलेंगे।
आदिवासी विकास का पहला म्यूजियम
इसम्यूजियम में आदिवासी विकास, कृषि के प्रकार, उनका इतिहास आदि को लाइव देखा जा सकेगा। देश में इस तरह का अभी कोई भी म्यूजियम नहीं है। यही कारण है कि बजट के लिए आदिम जाति विकास को प्रस्ताव भेजा गया है।
लाइव होती देश की कृषि प्रणाली
म्यूजियम में कई प्रदेशों की कृषि प्रणाली लाइव देखी जा सकती थी। इसमें प्राचीन आधुनिक कृषि यंत्र, बीज