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भर्ती के नाम पर 2.5 करोड़ रु. की वसूली

7 वर्ष पहले
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तकनीकीशिक्षाविभाग ने वर्ष 2008-09 में एमपीपीएससी के जरिए पॉलीटेक्निक कॉलेजों में व्याख्याताओं की संविदा नियुक्ति कराई थी, जबकि पीएससी संविदा नियुक्ति की परीक्षाएं नहीं करा सकता है। एमपीपीएससी ने अब तकनीकी शिक्षा विभाग की संविदा परीक्षा कराने के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया है। पीएससी की के बाद विभाग ने गेट के माध्यम से भर्ती परीक्षा कराने का फैसला लिया है। इसको लेकर आवेदक असमंजस में हैं। क्योंकि गेट से परीक्षा कराने पर तो अतिथि विद्वानों को अनुभव का लाभ मिलेगा और ही एमटेक या पीएचडी होल्डर्स को बोनस अंक। गेट के माध्यम से परीक्षा कराने के लिए विभाग ने जो विज्ञापन जारी किया है, उसमें आरक्षण प्रक्रिया का भी उल्लेख होने से आरक्षित वर्ग के आवेदक भी परेशान हैं।

गौरतलब है कि तकनीकी शिक्षा में व्याख्याताओं को प्रथम श्रेणी अधिकारी माना जाता है। प्रथम द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों की नियुक्ति का अधिकार केवल एमपीपीएससी को है। दूसरी तरफ उच्च शिक्षा विभाग भी पीएससी के माध्यम से कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती करा रहा है, जिसमें अतिथि विद्वानों को अनुभव के अंक, पीएचडी, नेट तथा स्लेट के बोनस अंक दिए जाने का प्रावधान है। पीएससी द्वारा आयोजित परीक्षाओं में आवेदकों से केवल 125 रुपए परीक्षा शुल्क लिया जाता है, लेकिन गेट इस परीक्षा के लिए 1500 रुपए फीस लेगा। यही नहीं तकनीकी शिक्षा विभाग भी रजिस्ट्रेशन के 250 रुपए लेगा। कुल मिलाकर आवेदकों के 1750 रुपए खर्च होंगे, जो पीएससी से 14 गुना ज्यादा हैं। आवेदकों पर इस तरह आर्थिक भार पड़ेगा। कई आवेदकों ने इसको लेकर अपना रोष भी प्रकट किया है।

15 हजार आवेदक देंगे परीक्षा

^मना करदिया है

एमपीपीएससीने परीक्षा कराने से मना कर दिया है। यही वजह है कि हम गेट के माध्यम से परीक्षा करा रहे हैं। इसमें जो भी उम्मीदवार योग्य होंगे, उन्हीं आवेदकों काे चयन कर इंटरव्यू के जरिए पदों को भरा जाएगा।

आशीषडोंगरे, डायरेक्टर,तकनीकी शिक्षा विभाग

^संविदा पदोंके लिए हम नहीं कराते हैं परीक्षा

संविदापदों के लिए एमपीपीएससी परीक्षा नहीं कराती। अब पहले संविदा पदों के लिए परीक्षा कैसे आयोजित कराई गई, इसकी जानकारी मुझे नहीं है।

मनोहरदुबे, सचिव,एमपीपीएससी