पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • संस्कारों का 80 फीसदी ज्ञान गर्भ में ही

संस्कारों का 80 फीसदी ज्ञान गर्भ में ही

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
गर्भमें शिशु के सुनने की शक्ति 16 वें सप्ताह में ही एक्टिव हो जाती है। एक तरह से शिशु अपने माता-पिता के संस्कारों का 80 प्रतिशत ज्ञान गर्भ में ही प्राप्त कर लेता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान आचरण, खाने-पीने, कपड़े, आभूषण पहनने आदि के चयन में सतर्कता बरतनी चाहिए। इसका असर शिशु पर पड़ता है। चिल्ड्रन यूनिवर्सिटी अहमदाबाद के कुलपति प्रो. हर्षद शाह ने यह बातें गुरुवार को उन दंपतियों से कहीं जो अपने घर में नए मेहमान के आने की तैयारी कर रहे हैं।

अटलबिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय द्वारा पुरानी विधानसभा परिसर में गुरुवार से दो दिवसीय दंपति सम्मेलन शुरू हुआ। पहले दिन सम्मेलन में 100 दंपतियों ने भाग लिया। सम्मेलन में इन दंपतियों को आने वाले बच्चे को सुसंस्कृत बनाने के तरीके बताए जा रहे हैं। सम्मेलन में कुलपति प्रो.हर्षद शाह ने बताया कि गर्भधारण के समय यदि महिलाएं गर्भ संस्कार की शिक्षा लेती हैं तो बच्चा स्वस्थ पैदा होगा। बच्चे को कुपोषण से बचाने के लिए गर्भवती महिलाओं को गर्भ संस्कार की शिक्षा देना जरूरी है। अभी तक के शोध में यह बात सामने आई है कि गर्भधारण के समय जिन महिलाओं ने गर्भ संस्कार की शिक्षा ली, उनके बच्चे स्वस्थ पैदा हुए हैं। प्रो. शाह ने बताया कि गुजरात में इस शिक्षा की सफलता के बाद अब मप्र को इसका लाभ मिलेगा।











गर्भ संस्कार की शिक्षा को उन्होंने कुपोषण रोकने का कारगर उपाय भी बताया है।

पुरानी विधानसभा परिसर में गुुरुवार से आयोिजत दंपति सम्मेलन काे संबोिधत करते चिल्ड्रन यूनिवर्सिटी अहमदाबाद के कुलपति प्रो. हर्षद शाह। फोटो|भास्कर

प्रो. शाह के अनुसार गर्भावस्था में महिलाओं को पहले महीने में हीरा चांदी, दूसरे में तांबा, तीसरे में पुखराज या स्वर्ण, चौथे में माणिक या स्वर्ण, पांचवें में चांदी, छठवें में नीलम या लौह खंड, सातवें में पन्ना, आठवें में आभूषण तथा नौवें में माणिक या स्वर्ण आभूषण धारण करना चाहिए। इसी तरह दिन के हिसाब से पहने जाने वाले कपड़ों के रंगों का भी ख्याल रखना चाहिए।

>महापुरुषों के जीवन चरित्र को पढ़ें। >भारतीय संतों की कथाएं पढ़ें। >प्रेरणादायी प्रसंगों और कहानियों को पढ़ें। >महापुरुषों के चित्र घर में लगाकर उनके दर्शन करें। >अच्छा संगीत सुनें।

यह है गर्भ संस्कार शिक्षा का उद्देश्य

-तेजस्वी संतान की