भोपाल. प्रस्तावित वार्ड नंबर 76। दो हिस्से। एक हिस्सा छोला गणेश मंदिर तो दूसरा हिस्सा पीपुल्स मॉल का। दोनों ही एक दूसरे से जुड़े नहीं। दोनों हिस्सों की दूरी भी एक किमी से ज्यादा। इनके बीच में वार्ड नंबर 73 और 79 के हिस्से। यानी कि एक ही कॉलोनी में तीन-तीन वार्ड का क्षेत्र। शहर में वार्डों के परिसीमन में हो रही गड़बड़ी यह महज एक बानगी है।
परिसीमन में जिस तरह से वार्ड बनाए गए हैं, वे गलतियों के पुलिंदे साबित हो रहे हैं। प्रस्ताव में भी खामियां है। वार्ड 76 के नक्शे को वार्ड 77 का नक्शा बता दिया गया है। यही नहीं, न तो सीमा रेखा खींचने के लिए रोड के मानक लिए गए और न ही कॉलोनी के।
250 घरों की कॉलोनी को तीन वार्डों में बांट दिया गया है। कौन से वार्ड में कौन पार्षद रोड बनाएगा, नाली बनाएगा, यह तय नहीं। ऐसे ही मनमाने ढंग से किए गए परिसीमन पर लोग जमकर आपत्तियां लगा रहे हैं।
वार्डों में हुई गड़बड़ी, सुधार की कवायद शुरू
दैनिक भास्कर के गुरुवार के अंक में 'आंकड़ों में हेराफेरी से कम किए एससी के वार्ड' शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन और नगर निगम ने अपनी गलती दुरुस्त करने की कवायद शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में कोलार नपा के विलय के बाद बनाए गए वार्ड नंबर 80, 81, 82, 83 और 84 में गलतियां सामने आई हैं।
यहां अफसरों ने अनुसूचित जाति की आबादी में से 15897 लोग कम कर दिए थे। लिहाजा अब गलती को सुधारने के लिए परिसीमन प्रस्ताव में संशोधन किया जाएगा। शुक्रवार को नगर निगम इसकी रिपोर्ट कलेक्टर निशांत वरवड़े को भेजेगा। इस संबंध में गुरुवार शाम पांच बजे कलेक्टोरेट में जिला प्रशासन और निगम अिधकारियों की बैठक हुई।
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