भोपाल. ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एम्स) में कार्यरत रेसीडेंट डॉक्टरों का कार्यकाल 3 से 6 महीने के लिए बढ़ेगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अफसरों व एम्स डायरेक्टर डॉ. संदीप कुमार के बीच इसकी सहमति बन गई है। इससे एम्स प्रबंधन और रेसीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के बीच चल रहा विवाद खत्म होता दिख रहा है।
एम्स डायरेक्टर डॉ. संदीप कुमार ने बताया कि संस्थान के रेसीडेंट डॉक्टरों का कार्यकाल बढ़ाने का मौखिक आश्वासन स्वास्थ्य मंत्रालय के अफसरों ने दिया है। साथ ही जिन रेसीडेंट डॉक्टरों काे सेवा समाप्त करने का नोटिस दिया गया था, उनकी सेवाएं 3 से 6 महीने तक बढ़ाने को कहा है।
इस कारण 64 रेसीडेंट डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त करने को लेकर खड़ा हुआ विवाद फिलहाल खत्म हो गया है। डॉ. कुमार ने बताया कि अफसरों ने रेसीडेंसी स्कीम के तहत पदस्थ किए गए रेसीडेंट डॉक्टरों की नियुक्तियों को वैध माना है। इन नियुक्तियों को लेकर औपचारिक आदेश स्वास्थ्य मंत्रालय की हाई पॉवर कमेटी की बैठक के बाद होंगे।
अस्पताल के वार्डों में ड्यूटी करेंगे डॉक्टर
एम्स डायरेक्टर ने बताया कि सीनियर रेसीडेंट डॉक्टरों के कार्यकाल में बढ़ोतरी का सीधा फायदा अस्पताल को होगा। रेसीडेंट डॉक्टर अस्पताल के वार्डों में ड्यूटी करते हैं। रेसीडेंट डॉक्टरों के कार्यकाल में बढ़ोतरी नहीं की जाती तो वार्डों में भर्ती मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पाता।
कार्यकाल बढ़ने से अस्पताल की ओपीडी और आईपीडी में मरीजों का इलाज करने के लिए ज्यादा डॉक्टर उपलब्ध रहेंगे। इससे ओपीडी में आए मरीज को इलाज के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।