भोपाल. 'पहले संगीत कान से ताल्लुक रखता था आजकल वो आंख से भी ताल्लुक रखता है। कोई भी गाना सुनने से ज्यादा देखा जा रहा है। लेकिन ऐसा नहीं की लोग अच्छा गाना सुनना नहीं चाहते। गाना चलता वही है जो गाया जा सके, लोगों के दिल में बस जाए। जो गाया नहीं जा सकता वो गाना नहीं।'
यह कहना है सुप्रसिद्ध म्यूजिक डायरेक्टर, म्यूजिक कंपोजर आनंद राज आनंद का। छोटा बच्चा जान के ना कोई, हद कर दी आपने, जिस देश में गंगा रहता है, जलेबी बाई, गणपत, इश्क समंदर और
अमिताभ बच्चन के लिए गाना गाकर फिल्म मेजर साब से शुरुआत करनेवाले आनंद राज आनंद एक निजी कार्यक्रम में हिस्सा लेने भोपाल आए, इस दौरान उन्होंने की सिटी भास्कर से बात।
...ये हमारी फिल्म में गाएगा
'1982 में मुझे गजलों का शौक चढ़ा। तब मैंने एलबम बनाने के लिए सोचा। गीत, गजल मैं लिखने लगा था। एक दोस्त के साथ मुंबई पहुंचा। 15 दिन हुए थे मायानगरी में मेरे एक दोस्त ने टीनू आनंद से मिलवाया। मैंने उन्हें अपने कुछ गीत सुनाए। टीनू बोले 10 दिन का इंतजार करो शायद कुछ अच्छा हो जाए। मुझे नौवें दिन टीनू का फोन आया कि तुम्हें अमिताभ बच्चन के सामने प्रेजेंटेशन देना है। मैंने अमित जी के सामने गाया। कुछ देर वो शांत रहे, मैं घबरा गया, फिर वो बोले, ये हमारी फिल्म में गा रहे हैं।'
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