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एंडरसन की रिहाई के लिए अफसरों ने बनाया था दबाव

9 वर्ष पहले
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भोपाल. यूनियन कार्बाइड कारखाने के मालिक वॉरेन एंडरसन की गिरफ्तारी के बाद से ही उन्हें छोड़ने के लिए राज्य सरकार के कई आला अफसरों ने दबाव बनाना शुरू कर दिया था।
हिरासत में लिए गए एंडरसन को जमानत की प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही छोड़ा गया। एंडरसन को दिल्ली तक छोड़ने के लिए कुछ पुलिस अधिकारी भी विमान में ‘उनके’ साथ गए थे।
यह खुलासा बुधवार को भोपाल गैस त्रासदी के वक्त हनुमानगंज थाना के प्रभारी रहे सुरेंद्र सिंह ठाकुर ने किया है। वे यूनियन कार्बाइड जहरीली गैस रिसाव जांच आयोग के अध्यक्ष जस्टिस एसएल कोचर के सामने बयान दर्ज करा रहे थे। ठाकुर ने बताया कि कारखाने से जब गैस रिसाव हुआ, उस वक्त वे गश्त पर थे।
वायरलेस सेट पर इसकी सूचना मिलने पर पुलिस ने सबसे पहले वहां रहने वाले लोगों से बस्तियां खाली कराईं थीं। गैस के असर से बचाने के लिए लोगों को शहर से बाहर पहुंचाया गया था। इसके बाद सीएसपी की मदद से थाने पर पहुंची उत्तेजित भीड़ को नियंत्रित करते हुए राहत एवं बचाव कार्य शुरू हुए थे।
हादसे के समय छुट्टी पर थे डीजीपी मुखर्जी
2-3 दिसबंर 1984 की रात जब यूनियन कार्बाइड कारखाना से जहरीली गैस रिसी, उस दिन तत्कालीन डीजीपी बीके मुखर्जी छुट्टी पर थे। यह जानकारी मुखर्जी ने जांच आयोग को बयान देने जारी हुए नोटिस के जवाब में दी है। आयोग के सचिव शशिमोहन श्रीवास्तव ने बताया कि अवकाश पर होने के कारण आयोग अब मुखर्जी के बयान नहीं लेगा।
पूर्व मुख्य सचिव और डीआईजी के बयान 3 अप्रैल को
जांच आयोग में भोपाल गैस त्रासदी मामले में पूर्व मुख्य सचिव केएस शर्मा और पूर्व डीआईजी वीपी सिंह के बयान 3 अप्रैल को होंगे। आयोग के सचिव श्रीवास्तव ने बताया कि दोनों अफसरों को पिछले महीने बयान देने के लिए हाजिर होने का नोटिस दिया गया था, जिसकी तामील नहीं हो सकी है। इस कारण 20 फरवरी को दोबारा दोनों अफसरों को बयान देने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। इसके अलावा हनुमानगंज थाना क्षेत्र के तत्कालीन सीएसपी रवींद्र सिंह चौहान को भी नोटिस जारी किया गया है। सभी को 3 अप्रैल को बयान देने बुलाया गया है।