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डाउनलोड करेंभोपाल. बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) ने रिसर्च स्कॉलर्स को उनके आधे-अधूरे नाम लिखे हुए पांच हजार रुपए के चैक थमा दिए हैं। इस कारण बैंक की शाखाओं ने ये चैक छात्रों को वापस कर दिए हैं। इसकी शिकायत छात्रों ने विवि प्रशासन से की है।
बताया जाता है कि करीब 1,500 रिसर्च स्कॉलर्स में से 30 फीसदी के चैक में अधूरे नाम लिखे हुए हैं। विवि ने चैक में किसी छात्र के नाम का केवल पहला अक्षर लिखकर सरनेम पूरा लिख दिया है या फिर किसी का नाम पूरा लिखकर सरनेम अधूरा लिखकर चैक जारी कर दिया है। इसी तरह कई छात्रों के चैक में राशि के स्थान पर सील भी पूरी नहीं लगाई है। यहीं नहीं करीब दस फीसदी चैक तो अभी बने ही नहीं हैं। रजिस्ट्रार एलएस सोलंकी ने गलती स्वीकारते हुए कहा है कि अधिकारियों को चैक में सुधार करने को कहा गया है।
चैक मिलने के बाद से अब रिसर्च स्कॉलर्स परेशान हो रहे हैं। उनका कहना है कि अधूरी जानकारी होना बताकर बैंक शाखाओं ने उनके चैक लेने से साफ इंकार कर दिया है। उनका कहना है कि जल्दबाजी मे चैक बनाने के कारण ही कुछेक में गलती हुई है। उन्होंने बताया कि जिन छात्रों के चैक में गलती हुई है, उसे सुधारने के लिए कहा जा चुका है।
विवि ने पीएचडी कोर्स में शामिल होने वाले सभी रिसर्च स्कालर्स से 10 हजार रुपए बतौर फीस जमा कराए थे। कोर्स वर्क में प्रेक्टिकल नहीं होने पर विवि ने बाद में छात्रों को पांच हजार रुपए लौटाने पर सहमति जता दी थी। लेकिन जब विवि ने पांच हजार रुपए का चैक नहीं लौटाया तो छात्रों ने प्रशासनिक भवन पर जमकर हंगामा किया। विवि ने इन छात्रों को 15 दिन में उनकी शेष राशि लौटाने का लिखित में आश्वासन दिया था। विवि को करीब एक करोड़ से ऊपर की राशि का भुगतान छात्रों को करना है।
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