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डाउनलोड करेंभोपाल. विंध्याचल की पर्वतमाला के मध्य स्थित है बेतवा नदी का उद्गम स्थल झिरी। रातापानी अभयारण्य के अंतर्गत आने वाले इस स्थल पर प्राकृतिक रूप से पानी की एक झिर निकली हुई है। इस झिर से कई सौ वर्षों से पानी निकल रहा है। यह पानी भोपाल, रायसेन और विदिशा जिले से होता हुआ यमुना नदी में मिलता है। इसके दर्शन के करने व पिकनिक मनाने के लिए सैकड़ों लोग आते हैं। कोलार के सर्वधर्म पुल से करीब 19 किलोमीटर दूर स्थित झिरी के विकास पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस धार्मिक स्थल की उपेक्षा हो रही है। करीब दो साल पहले यहां पर उद्गम
स्थल पर पक्का निर्माण किया गया है। कुंड बनाने के बजाए एक गोलाकार दीवार उठा दी गई है। बीच में उद्गम पर एक नंदी बना दिया गया है, जिसके मुख से पानी निकल रहा है। यह निर्माण भी यहां दो साल पहले ही किया गया है। वो भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर। मुख्यमंत्री बनने के बाद शिवराज सिंह चौहान जब अपनी कैबिनेट की बैठक के लिए कोलार डेम आए थे उस वक्त वे झिरी दर्शन के लिए रुके थे। तब उन्होंने इसका विकास करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया था।
पुरातत्व की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण
झिरी के आसपास कई शैलाश्रय बने हुए हैं, जिनमें आदि मानव निवास करते थे। यहां हुए पुरातत्व सर्वेक्षण में करीब 15 लाख साल प्राचीन पत्थर के औजार भी मिले हैं। ताम्र संस्कृति के अवशेष भी पाए गए हैं। इस क्षेत्र की खोज 1975 में प्रोफेसर शंकर तिवारी ने की थी। वन विभाग के सर्वेक्षण में भी इसे बेतवा उद्गम बताया गया है।
यमुना नदी में मिल जाता है झिरी का पानी
झिरी क्षेत्र में कोलार मेन रोड से करीब 500-600 मीटर की दूरी पर एक प्राकृतिक पानी की झिर निकली हुई है। सैकड़ों सालों से इस झिर से पानी ऊपर आ रहा है। यह पानी झिरी से निकलकर भोजपुर, रायसेन, विदिशा, होते हुए झांसी के निकट सुल्तानपुर स्थित यमुना नदी में जाकर मिलता है।
लोग मनाते हैं पिकनिक
झिरी कोलार ही नहीं बल्कि पूरे शहर में पिकनिक स्पॉट के रूप में फेमस है। कोलार डेम से छह किलोमीटर पहले पड़ता है। लोग यहां परिवारजनों के साथ पिकनिक मनाते हैं।
धार्मिक महत्व
प्राचीन साहित्य में बेतवा नदी को वेत्रवती कहा है। इसका वर्णन कालीदास द्वारा रचित मेघदूत पुस्तक में है। इसके किनारे कई सभ्यताओं का विकास हुआ। बेतवा नदी के किनारे रामायण और महाभारत कालीन दशाण क्षेत्र था। उस समय इसकी राजधानी विदिशा थी।
बेतवा नदी का उद्गम स्थल झिरी कई मायनों में महत्वपूर्ण है। उसका विकास ठीक उसी तरह होना चाहिए, जिस तरह से अमरकंटक में नर्मदा नदी के उद्गम स्थल का किया गया है। इसके अलावा झिरी में पुरातत्व सर्वेक्षण किए जाने पर कई अहम जानकारियां प्राह्रश्वत हो सकती हैं।- डॉ. नारायण व्यास, पुरातत्वविद्
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