भोपाल. नगर निगम को 85 वार्डों में बांटने के लिए किया गया परिसीमन राजनीति का गेम प्लान बन गया है। जो वार्ड अब तक कांग्रेस के गढ़ माने जाते थे, उन्हें भेदने के लिए वार्डों में से कांग्रेस के वोट बैंक वाले इलाके हटाकर भाजपा के वोट बैंक वाले इलाके जोड़े गए हैं। इस पैंतरेबाजी में वार्डों का परिसीमन गलतियों का पुलिंदा बन गया है। उधर, परिसीमन पर दावे - अापत्तियां के अंतिम दिन शुक्रवार को 80 आपत्तियां आईं। कलेक्टोरेट में दिनभर आपत्तिकर्ताओं को आवाजाही रही। जबकि कांग्रेस ने परिसीमन में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ कलेक्टोरेट तक पैदल मार्च कर प्रदर्शन किया।
नए परिसीमन में जिन 15 वार्डों को बढ़ाया गया है, उनमें से 12 वार्डों में अब तक के चुनावों में भाजपा को बढ़त मिलती रही है। जिन वार्डों का स्वरूप बदलकर नए वार्ड बनाए गए हैं, वे भी भाजपा के लिए मुफीद हैं। कांग्रेस के लिए राहत की बात सिर्फ यह है कि उत्तर विधानसभा में परिसीमन के बाद भी वह मजबूत है। वरिष्ठ कांग्रेसी पार्षदों का मानना है कि वोटों का ध्रुवीकरण होने पर पार्टी 13 में से 9 वार्ड में बढ़त हासिल कर सकती है। जबकि गोविंदपुरा, हुजूर और नरेला विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी को काफी नुकसान हो सकता है। यहां कांग्रेस के लिए मजबूत माने जाने वाले वार्डों को तोड़कर उनमें भाजपा का वोट बैंक वाला हिस्सा जोड़ा गया है।
किस विधानसभा क्षेत्र में क्या बनेगा गणित
मध्य
दिक्कत- नेता प्रतिपक्ष मोहम्मद सगीर के मौजूदा वार्ड 42 को तोड़कर नए बनाए गए वार्ड 43 में कांग्रेस का वोट बैंक माने जाने वाले मुकद्दस नगर को निकालकर एमपी नगर शामिल कर दिया गया। कांग्रेसी पार्षद काजल बाखरू को नुकसान पहुंचाने के लिए मौजूदा वार्ड 49 में वार्ड 50 का हिस्सा जोड़ दिया। यह भाजपा का वोट बैंक वाला हिस्सा है। इसी तरह शाहपुरा ए,बी और सी सेक्टर को भाजपा ने तीन वार्डों में बांटकर डैमेज कंट्रोल का प्रयास किया है।
गोविंदपुरा
दिक्कत- कांग्रेसी पार्षदों मनीष यादव, महेंद्र परमार और गिरीश शर्मा के मौजूदा वार्ड लगभग खत्म। यादव और उनका परिवार पिछले 20 सालों से आनंद नगर क्षेत्र से जीत रहा है। लिहाजा, इस बार कांग्रेसी वोट बैंक शिवनगर को हटाते हुए, भाजपा के वोट बैंक माने जाने वाले सिद्धार्थ लेक सिटी और छोटी खजूरी आदि यहां शामिल किए। शर्मा के वार्ड से इंडस्ट्रियल एरिया के झुग्गी क्षेत्र हटा दिए गए।
दक्षिण-पश्चिम
दिक्कत- कांग्रेस के सबसे मजबूत वार्ड नंबर 30 के तीन टुकड़े किए। इसमें रोशनपुरा झुग्गी बस्ती होने के कारण भाजपा कभी जीत नहीं पाई थी। इसका एक हिस्सा नए वार्ड 24 में डाल दिया गया। इसी तरह नेहरू नगर में कांग्रेसी पार्षद संतोष कंसाना के मौजूदा वार्ड 27 के दो टुकड़े कर नए वार्ड 28 और 29 बनाए गए। इनमें मौजूदा वार्ड 26 के भाजपा वोट बैंक वाले इलाके वैशाली नगर, निवेश नगर में दोनों जगह पार्टी को मजबूत किया गया है। इसी तरह कांग्रेस के कब्जे वाले मौजूदा वार्ड 46 में पंचशील नगर वाले हिस्से को परिसीमन में तोड़कर तीन भागों में बांट दिया गया है।
नरेला
दिक्कत- कांग्रेसी पार्षदों आशाराम शर्मा, कल्पना गोहिल, हेमलता कुशवाह और कृष्णा साहू के वार्ड नंबर 35, 36 और 37 को तोड़कर नए वार्ड बना दिए गए हैं। शर्मा के वार्ड में से कासिम कैंप को हटाकर कम्मू के बाग को जोड़ दिया गया। कल्पना गोहिल के वार्ड में सुदामा नगर, छोटा चंबल आदि इलाके काट दिए गए हैं। इसके अलावा मौजूदा वार्ड 64, 66 और 68 में भी तोड़फोड़ कर नए वार्ड बनाए गए हैं, जो भाजपा के लिए मुफीद हैं।
उत्तर
दिक्कत-कांग्रेस का गढ़ कहलाने वाले इस क्षेत्र में निगम अध्यक्ष कैलाश मिश्रा के मौजूदा वार्ड का अस्तित्व खत्म कर खानूगांव जोड़ दिया गया। चिरायु अस्पताल के आसपास वाले वोट बैंक का हिस्सा कटा। माहिरा सलामुद्दीन के मौजूदा वार्ड 5 को परिसीमन में वार्ड 7 कर इसमें उनके वोट बैंक खानूगांव को हटा दिया गया। यानी अब यह सीट भाजपा के लिए मुफीद है। इसी तरह शाहिद अली, अब्दुल शफीक, सुधीर गुप्ता आदि के समीकरण बिगाड़ने की कोशिश की गई है।
हुजूर
दिक्कत-मौजूदा वार्ड नंबर एक अभी कांग्रेस के कब्जे में है। लिहाजा यहां गांधीनगर में कांग्रेस के वोट बैंक वाला एक बड़ा हिस्सा वार्ड दो मिला दिया गया है। वार्ड दो में भाजपा बेहद मजबूत है, इसलिए यह हिस्सा मिलने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उल्टे कांग्रेस वार्ड एक में कमजोर हो जाएगी। कोलार क्षेत्र में होशंगाबाद रोड के बायीं ओर के गांव भी मिलाकर वार्ड 84 बना दिया गया है। इससे भाजपा इस वार्ड में मजबूत हो गई। इसी तरह वार्ड 80, 81, 82 और 83 का परिसीमन भी भाजपा के राजनीतिक फायदे के हिसाब से किया है।
"यह प्रशासनिक परिसीमन नहीं, बल्कि भाजपा का परिसीमन है। वार्डों की सीमाएं पगडंडियों से तय कर दी गई हैं। इसका सीधा असर विकास पर पड़ेगा। वार्डों में एक्जाई प्लानिंग नहीं होगी। शिकायतें कौनसा पार्षद सुनेगा, लोगाें को यह पता ही नहीं चल पाएगा।’’
पीसी शर्मा, जिला अध्यक्ष, कांग्रेस
"दरअसल, कांग्रेस को अभी से निगम चुनावों में हार नजर आने लगी है, इसलिए हार का बहाना पहले से ढूंढ लिया है। परिसीमन प्रशासनिक है। कुछ गलतियां है, जिन पर हमारी पार्टी के सदस्यों ने भी आपत्ति लगाई है।’’
आलाेक शर्मा, जिला अध्यक्ष, भाजपा