भोपाल. नगर निगम के नए क्षेत्र में 85 वार्डों के हिसाब से परिसीमन के बाद अब जिला प्रशासन ने वार्डों के आरक्षण की कवायद शुरू कर दी है। परिसीमन में इस बार अनारक्षित श्रेणी फायदे में हैं। इस बार 52 वार्ड अनारक्षित श्रेणी में है, जबकि पहले यह संख्या महज 41 थी। अनुसूचित जनजाति (एसटी) को कोई फायदा नहीं हुआ है। इसके लिए पहले की तरह दो वार्ड ही आरक्षित हैं। अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग में भी सिर्फ एक वार्ड का इजाफा हुआ है। अब एससी के लिए 10 वार्ड आरक्षित होंगे। ओबीसी श्रेणी के आरक्षित वार्डों की संख्या 18 से बढ़कर 21 हो गई है।
आबादी और वार्ड बढ़ने की वजह से नगर निगम को एससी और एसटी के लिए नए सिरे से वार्ड आरक्षित करने पड़ रहे हैं। लेकिन 15 वार्डों का इजाफा होने के बाद भी एससी और एसटी को फायदा नहीं हुआ है क्योंकि इनकी कुल आबादी क्रमश: महज 11.86 और 2.67 फीसदी है। इस हिसाब से अब एससी और एसटी के लिए कुल 12 वार्ड आरक्षित होने जा रहे हैं। ओबीसी के आरक्षित वार्डों का फैसला लॉटरी से होगा।
कैसे होता है आरक्षण
सबसे पहले कुल आबादी में एससी और एसटी आबादी का प्रतिशत निकाला जाता है। फिर इस प्रतिशत को कुल वार्ड के हिसाब से बांट दिया जाता है। यानी कि 85 वार्ड में एसटी आबादी का प्रतिशत 2.67 है, इसलिए तीन वार्ड एसटी के लिए आरक्षित होंगे। जिन तीन वार्डों में एसटी की आबादी का सबसे ज्यादा प्रतिशत होगा, उन्हें आरक्षित घोषित कर दिया जाएगा। इसके बाद कुल वार्ड में से 25 प्रतिशत ओबीसी के लिए रखे जाते हैं। यानि कि 21 वार्ड। अब यह 21 वार्ड कौन से होंगे, इसका फैसला एससी और एसटी के वार्ड हटाने के बाद बचे हुए वार्डों में लॉटरी से किया जाता है। परिसीमन के कारण इस बार चक्रानुक्रम लागू नहीं होगा। वहीं, इस आरक्षण के बाद इन्हीं में से लॉटरी निकालकर 50 प्रतिशत वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाते हैं।