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डाउनलोड करेंभोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के विधायक पुत्र दीपक जोशी का मानना है कि भाजपा में पट्ठा वाद और परिवारवाद चरम पर है। पार्टी में गणेश परिक्रमा करने वालों को प्राथमिकता देने का ही नतीजा है कि भाजपा कर्नाटक में चुनाव हार गई। पार्टी को कुशाभाऊ ठाकरे और प्यारेलाल खंडेलवाल की बताई दशा और दिशा पर नहीं ले जाया गया तो मप्र में भी यही हाल होगा।
दीपक जोशी ने बुधवार रात साढ़े दस बजे अपने फेसबुक प्रोफाइल पर यह टिप्पणी लिखी है। जोशी की इस टिप्पणी को करीब तीन दर्जन नेताओं और कार्यकर्ताओं ने लाइक किया और करीब बीस ने इस पर अपने कमेंट लिखे हैं। इनमें जोशी के विचारों से सहमति जताई गई है।
संगठन और सरकार में हाशिए पर चल रहे जोशी ने लिखा कि कर्नाटक की हार भाजपा नीति और सिद्धांतों की हार नहीं है। यह हार भाजपा के वर्तमान नेतृत्व को सोचने के लिए है कि किस प्रकार के कार्यकर्ताओं ने इस संगठन को खड़ा किया और अब वे संगठन को किस दिशा में ले जा रहे हैं। गणेश परिक्रमा करने वालों को प्राथमिकता देने की गलती जिस व्यक्ति ने की उसे इसे स्वीकार करना चाहिए।
सुमित्रा महाजन ने नहीं दिया सच का साथ : सौमित्र
मप्र भाजपा के मुखपत्र चरैवेति को लेकर उपजा विवाद शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। पत्रिका के संपादक पद से हटाए गए अनिल सौमित्र ने सांसद सुमित्रा महाजन को एक कड़ा पत्र लिखा है। पत्र में सौमित्र ने कहा है कि आपके बारे में मेरी यह धारणा गलत साबित हुई है कि आप सच कहती हैं और हमेशा सच का साथ देती हैं।
सौमित्र ने लिखा कि आपने प्रभात झा के प्रदेशाध्यक्ष निर्वाचन के समय प्रक्रिया का सवाल उठाया था लेकिन आपको पं. दीनदयाल विचार प्रकाशन का पुन: अध्यक्ष निर्वाचित करने में भी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। सब कुछ चोरी-चोरी चुपके-चुपके हो गया। सौमित्र ने प्रदेश संगठन महामंत्री अरविंद मेनन और सांसद महाजन से पूछा है कि जब तत्कालीन सचिव और भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ. हितेष वाजपेयी ने पैसे खाए और बयानबाजी की तो कार्रवाई मेरे खिलाफ क्यों हुई?
वाजपेयी पर तमाम आरोप लगाते हुए पत्र में कहा गया है कि सहयोगी को लांछित करने और संगठन को नुकसान पहुंचाने के बावजूद उनका कोई बाल बांका नहीं कर सका। सौमित्र ने ताई से पूछा है कि उन्होंने नियम प्रक्रियाओं के पालन के बारे में कभी पूछताछ की या नहीं? मैं यह भी जानना चाहता हूं कि मेरे साथ एक दोषी और अपराधी की तरह व्यवहार क्यों किया गया? सौमित्र ने यह पत्र आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहनराव भागवत, भैयाजी जोशी, सुरेश सोनी और भाजपा के सभी वरिष्ठ नेताओं को भेजा है।
चर्चा में पत्र
डॉ. हितेष वाजपेयी की ओर से मेनन को लिखा गया एक कथित पत्र भी चर्चा में है। इसमें सौमित्र को माक्र्सवादी विचारधारा का व्यक्ति बताया गया है।
॥मुझे सौमित्र का पत्र नहीं मिला है। पत्र मिलने के बाद मैं प्रतिक्रिया दूंगी,लेकिन मुझे मिलने से पहले पत्र प्रेस को क्यों जारी किया गया।
सुमित्रा महाजन, सांसद
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