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डाउनलोड करेंभोपाल. प्रदेश के इकलौते सुपर स्पेशिलिटी भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) में स्टाफ का संकट गहराता जा रहा है। न्यूरोसजर्न डॉ. नितिन गर्ग के बाद शनिवार को नेत्र रोग विभाग की प्रमुख डॉ. डॉली चंद्रा ने भी डायरेक्टर को इस्तीफा सौंप दिया। डेढ़ सप्ताह के भीतर अस्पताल में यह पांचवे डॉक्टर का इस्तीफा है। वहीं, डायरेक्टर डॉ. मनोज पांडे अस्पताल में पर्याप्त संख्या में डॉक्टर होने का दावा कर रहे हैं।
नौ जनवरी से अब तक यहां के पांच डॉक्टर इस्तीफा दे चुके हैं। इसका असर विभागों पर हो रहा है। गेस्ट्रोसर्जन डॉ. सुबोध वाष्र्णेय के इस्तीफे के बाद विभाग में दो डॉक्टर बचे हैं। विभाग में डॉक्टरों के 8 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 5 खाली हैं। कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के 8 में से पांच खाली हैं। न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट में तो एक न्यूरोफिजिशियन के भरोसे ही मरीजों का इलाज हो रहा है। वहीं न्यूरोसर्जरी डिपार्टमेंट में अब एक भी सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं हैं।
सेवा शर्तों से परेशानी
संस्थान के डॉक्टर्स कम वेतन और खराब सेवा शर्तों के कारण नौकरी छोड़ रहे हैं। आईसीएमआर ने जब अस्पताल को अधिग्रहित किया था, उस समय डॉक्टर और पेरामेडिकल स्टाफ को प्राइवेट पेशेंट शेयर मिलता था। उपकरणों की मरम्मत शिकायत करने के 24 घंटे के भीतर हो जाती थी। अब स्थिति इसके विपरीत है। उपकरणों की मरम्मत शिकायत किए जाने के दो - दो महीने बाद तक नहीं होती। इससे डॉक्टर्स को मरीजों के इलाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कब किसका इस्तीफा
:जीसी गौतम कार्डियो फिजीशियन अक्टूबर 2012 :महेंद्र कुमार अटलानी नेफ्रोलॉजी अक्टूबर 2013 :सुबोध वाष्र्णेय गेस्ट्रो सर्जरी 9 जनवरी 2014 :कमलेश तलेसरा रेडियो डाइग्नोसिस 9 जनवरी 2014 :नंदकिशोर अरविंद यूरोलॉजी 15 जनवरी 2014 :स्कंद त्रिवेदी, कार्डियोलॉजिस्ट, 18 जनवरी 2014 :नितिन गर्ग, न्यूरोसर्जन 21 जनवरी 2014.
...तो दो महीने में बंद हो जाएगा अस्पताल
इस अस्पताल से डॉक्टर नौकरी छोड़ रहे हैं। विभागों की मशीनें लंबे समय से खराब हैं। चिकित्सा सेवाएं बिगड़ रही हैं। यही स्थिति रही तो दो महीने में अस्पताल बंद हो जाएगा। यह आशंका भोपाल गैस पीडि़त महिला उद्योग संगठन के संयोजक अब्दुल जब्बार ने जताई है। पत्रकारों से चर्चा में उन्होंने बिगड़ती सेवाओं के लिए आईसीएमआर को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही सरकार से मांग की है, जल्द ही डॉक्टरों के खाली पद भरे जाएं। ऐसा नहीं करने पर गैस पीडि़तों को बेहतर इलाज नहीं मिल पाएगा।
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