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'मर्ज' की दवा के लिए झेलना पड़ा 'दर्द', दिनभर भटकने पर भी नहीं मिला सुकून

8 वर्ष पहले
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भोपाल। दवा नीति 2013 के विरोध में शुक्रवार को दवा व्यापारियों ने दुकानें बंद रखीं। हड़ताल का सबसे ज्यादा असर प्राइवेट अस्पतालों की ओपीडी पर पड़ा। यहां अन्य दिनों की अपेक्षा आधे ही मरीज इलाज कराने पहुंचे। भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन ने पांच दवा दुकानों के खुला रहने की जानकारी दी थी, परंतु बैरागढ़, काटजू और जेपी अस्पताल स्थित इन दवा दुकानों के बंद रहने के कारण लोगों को परेशान होना पड़ा।

सबसे ज्यादा परेशानी हमीदिया अस्पताल व उसके आसपास के अस्पतालों में इलाज कराने पहुंचे मरीजों व उनके परिजनों को हुई। इसकी वजह भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन द्वारा पुराने शहर में एक भी दवा दुकान को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत खुला रखने की अनुमति नहीं दिया जाना था। वहीं नए शहर के रेडक्रॉस हॉस्पिटल स्थित दवा दुकान पर दिनभर मरीजों की भीड़ लगी रही। स्टोर के प्रोपराइटर दिवाकर सिंह परिहार ने बताया कि सामान्य दिनों की तुलना में शुक्रवार को 50 फीसदी ज्यादा दवाएं बिकीं।