(अपनी किताबो संग आध्यात्मिक गुरु ओशो रजनीश।)
जबलपुर. 11 दिसंबर 1931 को मध्य प्रदेश के रायसेन शहर के कुच्वाडा गांव में आध्यात्मिक गुरु ओशो रजनीश का जन्म हुआ। इस अवसर पर आचार्य रजनीश के दोस्त अरविंद जैन ने dainikbhaskar.com के साथ खास बातचीत की। अरविंद जैन सन् 1950 से 1971 तक आचार्य रजनीश के साथ रहे।
कॉलेज से निकाल दिए गए थे ओशो...
वे बताते हैं कि वे सन् 1951 में उन्होंने हितकारिणी सिटी कॉलेज (अब हितकारिणी गर्ल्स कॉलेज) में एडमीशन लिया और 1953 तक पढ़ाई की। पढ़ाई के दौरान एक प्रोफेसर एस.एन.एल. श्रीवास्तव लॉजिक पर लेक्चर दे रहे थे तभी रजनीश से उनका डिबेट हुआ।
डिबेट काफी देर तक चला और रजनीश के तर्क इतने सटीक थे कि कक्षा में बैठे लगभग 70 छात्रों ने रजनीश के डिबेट पर जोर से टेबिल थपथपा कर तालियां मार दीं फिर क्या था हितकारिणी सिटी कॉलेज के प्रोफेसर चनपुरिया जी ने रजनीश को अपने कमरे में बुलाया और कहा कि हम अपने प्रोफेसर को तो निकाल नहीं सकते पर तुमसे एक निवेदन है कि हम तुम्हारी डिग्री और सर्टिफिकेट में कुछ भी ऐसा नहीं लिखेंगे जो तुम्हें हानि पहुंचाए पर हमें क्षमा कीजिए आप किसी और कॉलेज में एडमीशन ले लें। इस दौरान डी.एन.जैन कॉलेज के प्रिंसिपल ने रजनीश को बुलाया और कहा कि मैं तुम्हें अपने कॉलेज में एडमीशन दे सकता हूं पर शर्त यह है कि हमारे यहां प्रोफेसर सुल्लेरे लॉजिक का पीरियड लेते हैं उस पीरियड को तुम अटेन्ड नहीं करोगे, ओशो मान गए और उस पीरियड के दौरान वे अक्सर कॉलेज के बाहर बने कुएं की पाटी पर बैठे रहते थे।
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