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को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी: 20 साल से चक्कर कटवा रहे सहकारिता अफसर

7 वर्ष पहले
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भोपाल. जिस प्लॉट की आस में अपनी जिंदगी भर की कमाई लगा दी, वह 20 साल गुजरने के बाद भी उन्हें नहीं मिला। प्लॉट की आस में वे सालों से सोसायटी और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते रहे। अफसरों व मंत्रियों को न जाने कितने आवेदन दिए, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। न प्लॉट मिले न जालसाजों पर कार्रवाई हुई। प्लॉट की आस में लोग आज भी परेशान हो रहे हैं और सरकारी दफ्तरों के रिकॉर्ड कहते हैं कि ऐसी 4500 शिकायतों में 4350 से ज्यादा सुलझा ली गई हैं।

दैनिक भास्कर ने मंगलवार को 'को- ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी में सीएम की पत्नी और मंत्री की बेटी को भी नहीं मिला प्लॉट' शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद मंगलवार को 200 से ज्यादा लोगों ने दैनिक भास्कर को अपना दर्द बताया। फोन कॉल्स में लोगों का दर्द था और व्यवस्था के प्रति गुस्सा भी। लोगों का सवाल है कि आखिर उनका क्या कसूर है?
लोगों का सवाल- आखिर कौन दिलाएगा हमारा प्लॉट ?
नहीं मिल रही बिल्डिंग परमिशन
फूड इंस्पेक्टर धनंजय खामबेटे कहते हैं कि गुलाबी नगर हाउसिंग सोसायटी में उन्होंने प्लॉट लिया था। रजिस्ट्री करा ली। नामांतरण भी हो गया, लेकिन अब बिल्डिंग परमिशन नहीं मिल रही है। नूतन कॉलेज में फिजिक्स की प्रो. डॉ. पूर्णिमा सिंह कहती हैं कि इसी सोसायटी में उन्होंने भी सदस्यता ली थी। प्लॉट के लिए रुपए जमा कराए थे, लेकिन न प्लॉट मिला न कोई सुनवाई हुई। लखेरापुरा के कपड़ा व्यापारी प्रशांत मालवीय और अरुणा चतुर्वेदी को भी रुपए जमा कराने के बावजूद इस सोसायटी में प्लॉट नहीं मिला।
अब इस उम्र में िकससे लड़ने जाएं
महालेखाकार अॉफिस में पदस्थ प्रशांत धवले ने 1997 में रोहित गृहनिर्माण सोसायटी की सदस्यता ली और प्लॉट के लिए राशि जमा की। वर्ष 2000 के बाद सदस्य बने लोगों को भी प्लॉट मिल गए, लेकिन श्री धवले को नहीं मिला। 80 साल के सतीश सिंह कहते हैं कि 2001 में रजिस्ट्री कराई थी। 2006 में पता चला कि इसी प्लॉट की रजिस्ट्री किसी और के नाम है। अब इस उम्र में किससे लड़ने जाएं?
कहीं बेटी तो कहीं पत्नी लड़ रही है हक की लड़ाई
हर्षवर्धन नगर निवासी रितु वाजपेयी कहती हैं कि उनकी मां साधना पाठक ने 20 साल पहले सर्वधर्म सोसायटी ई सेक्टर में प्लॉट के लिए रुपए जमा किए थे। कुछ साल पहले मां का निधन हो गया। अब रितु प्लॉट के लिए परेशान हो रही हैं। कोलार निवासी जीपी शर्मा ने भी इसी सोसायटी में रुपए जमा कराए थे। पांच साल पहले उनकी मौत हो गई। उनकी पत्नी धनकुंवर शर्मा बच्चों के साथ किराए के मकान में रह रही हैं। प्लॉट के लिए अफसरों के चक्कर काट रही हैं। फोन पर भास्कर संवाददाता से बात करते हुए श्रीमती शर्मा रूंधे गले से पूछती हैं, अब भी प्लॉट मिलने की कोई उम्मीद है क्या?
मंत्री का जवाब- दशहरे के बाद बुलाएंगे खुला मंच
शहर में हाउसिंग सोसायटी की शिकायतों के बारे में मैंने अधिकारियों से चर्चा की है। उनसे पेंडिंग प्रकरणों की पूरी जानकारी मंगवाई है। हम सभी प्रकरणों की समीक्षा करेंगे। देखेंगे कि किस मामले का बेहतर समाधान कैसे किया जा सकता है। दशहरे के बाद हम खुला मंच बुलाकर इन प्रकरणों का निराकरण शुरू करेंगे। इसके लिए जल्द ही तारीख घोषित कर देंगे। ''
गोपाल भार्गव, सहकारिता मंत्री