भोपाल. केंद्र ने बैंकों में अनुकंपा नियुक्ति पर पिछले दस साल से लगा प्रतिबंध हटा दिया है। वित्त मंत्रालय से जारी ताजा आदेश में कहा गया है कि अब सार्वजनिक क्षेत्र के किसी भी बैंक में कार्यरत कर्मचारी अथवा अधिकारी की आकस्मिक मृत्यु होने पर उसके आश्रित को केंद्र सरकार के कर्मचारियों की भांति ही अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी। इसके साथ ही बैंकों में वर्तमान में चल रही अनुग्रह राशि के मौजूदा प्रावधान को बंद कर दिया गया है।
खास बात यह है कि अनुकंपा नियुक्ति के पुराने प्रकरणों में बैंकों के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को निर्णय लेने को कहा गया है। यह योजना 11 अगस्त 2014 से लागू मानी जाएगी। इस फैसले से उन परिवारों को लाभ होगा जिनके परिवार के मुखिया की सेवा काल में मृत्यु हो जाने पर परिवार को आर्थिक संकट झेलना पड़ता है। आंकड़े बताते हैं कि औसतन एक वर्ष में 30 से 35 हजार बैंककर्मियों की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है।
यूपीए सरकार ने 2004 में बैंकों में अनुकंपा नियुक्ति पर रोक लगा दी थी। इस निर्णय को लेकर तर्क दिया गया था कि बैंक व्यावसायिक संस्थान की तरह काम करता है। इस पर मानवीय बोझ न डाला जाए। मोदी सरकार ने प्रतिबंध हटाने से पहले यूपीए के निर्णय के उलट मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की बात करते हुए यह पता लगाया कि बैंकों में अनुकंपा नियुक्ति के कितने मामले आते हैं?
केंद्र सरकार ने संबंधित बैंकों को आदेश दिए हैं कि वे इस योजना को अपने बोर्ड से अनुमोदित कर लागू करें। अनुकंपा नियुक्ति की नीति लागू करते हुए केंद्र सरकार ने यह भी साफ किया है कि लिपिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के मामलों में ही नियुक्ति होगी। इसके अलावा प्रकरण विशेष को ध्यान को रखते हुए आयु सीमा में छूट पर भी विचार किया जा सकता है।
नए प्रावधान में यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी बैंक में पद रिक्त होने पर भर्ती किए जाने पर यदि प्रतिबंध लगा है तो भी अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में प्राथमिकता के आधार पर निर्णय लिया जाए। क्योंकि इन नियुक्तियों को बैंक रिक्रूटमेंट से अलग रखा गया है।
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