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जिम्मेदार कौन: सरकारी एजेंसियों में तालमेल नहीं, परेशान हो रही जनता

7 वर्ष पहले
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भोपाल. शहर में न तो पानी सप्लाई का समय तय है, न यह पता है कि कौन सी सड़क किस एजेंसी की है। कहीं एक दिन छोड़कर 20 मिनट भी पानी नहीं मिल रहा है, तो कहीं दिन में दो बार पानी सप्लाई हो रही है। कुछ ही महीनों पहले बनी सड़कें केबल और पाइपलाइन डालने के लिए बेतरतीबी से उखाड़ दी गई हैं, लेकिन खुदाई की परमिशन किसने दी, किसी को पता नहीं।
यह सब हो रहा है सरकारी एजेंसियों के बीच तालमेल न होने से। और परेशान हो रही है शहर की जनता। सोमवार को जिला योजना समिति की बैठक में भी यह मामला उठा।
जनप्रतिनिधियों ने सवाल किए तो अफसर एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराते रहे।
प्रभारी मंत्री गोपाल भार्गव की अध्यक्षता में हुई बैठक में अफसरों के बीच तालमेल की कमी साफ नजर आई। खराब सड़कें, पानी, अतिक्रमण, अवैध निर्माण जैसे आम आदमी से जुड़े हर सवाल पर अफसर जिम्मेदारी से बचते रहे। कुछ अफसरों ने तो यह मान भी लिया कि उनके बीच आपसी तालमेल न होने से यह स्थिति बनी। जनप्रतिनिधि सवाल पर सवाल करते रहे और अफसर कहते रहे कि आगे ऐसी स्थिति न बने, इसका वे ध्यान रखेंगे।
दो घंटे देर से पहुंचे निगम कमिश्नर विधायकों ने कहा-निंदा प्रस्ताव लाएं
नगर निगम कमिश्नर तेजस्वी एस नायक बैठक शुरू होने के दो घंटे बाद पहुंचे। उनके आने से पहले पानी व सीवेज से जुड़े सवाल पर कलेक्टर निशांत वरवड़े, कमिश्नर के आने की बात कहकर जनप्रतिनिधियों को शांत कराते रहे। इसी बीच विधायक रामेश्वर शर्मा ने नायक के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की मांग की।
विधायक विश्वास सारंग भी इस पर सहमत थे। दोपहर 2 बजे कमिश्नर वहां पहुंचे और उन्होंने देरी से आने के लिए माफी मांगी, तब जाकर विधायकों का गुस्सा शांत हुआ। विधायकों ने सवाल किए तो नायक ने कहा कि वे अलग-अलग विधायकों व पार्षदों से उनके क्षेत्र की समस्याएं जानकर, उन्हें सुलझा लेंगे।
किसी को नहीं पता किसने दी सड़क खोदने की परमिशन
शहर की हर सड़क कहीं केबल डालने के नाम पर, तो कहीं पाइपलाइन के नाम पर खोद दी गई है। इनमें वे सड़कें भी हैं, जो छह महीने पहले बनी हैं। लेकिन किसी अफसर के पास इसका जवाब नहीं कि सड़क खोदने की अनुमति किसने दी? न यह मालूम है कि कब तक काम पूरा करके रीस्टोरेशन हो जाएगा। बैठक में विधायक रामेश्वर शर्मा ने खराब सड़कों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि निर्माण एजेंसी अपनी जिम्मेदारी लेने से बचती है। कौनसी सड़क किसकी है, यह पता ही नहीं चलता।

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