भोपाल. रायसेन रोड पर पहाड़ों के बीच एक तरफ जहां रामगढ़, समरधा रेंज और सतकुंडा पुरातात्विक महत्व के पर्यटन केंद्र बने बने हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ चोर सागोनी ग्राम में नए बायपास के पूर्वी क्षेत्र में मौजूद कौशलपुर धाम रामघाट पुराना खेड़ा हनुमान मंदिर मौजूद हैं, जहां नदी पार कर बिना नाव के नहीं पहुंचा जा सकता है। मंदिर के सेवाकारी पूजन सिंह पंडा ने यहां 36 दिवसीय अखंड रामायण शुरू करवाई। इसका समापन 5 जनवरी 2015 को होगा।
नदी के उस पार पहाड़ और जंगल के बीच बने इस मंदिर के चारों ओर हिल स्टेशन जैसा नजारा दिखाई देता है। इसे अगर विकसित किया जाए और नदी पर पुल बन जाए तो इस क्षेत्र के सबसे अच्छे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है। चारों ओर पहाड़ों की श्रृंखला और तलहटी में बहती नदी के एक किनारे चाेर सागोनी गांव बसा है। जबकि दूसरी तरफ घना जंगल और नदी के किनारे हनुमान जी का मंदिर है, जहां दिन रात रामायण की चौपाइयां और दोहे सुनाई दे रहे हैं।
इस मंदिर में सिर्फ दो साधु हैं, जिसमें से एक रामायण का पाठ करते हैं तो दूसरा श्रृद्धालुओं को नदी पार करने के लिए नाव चलाते हैं। इन साधुओं को भरोसा है कि जंगल में उनकी रक्षा हनुमान जी ही कर रहे हैं। क्योंकि यहां रात को जंगली जानवरों की दहाड़ और चहलकदमी सुनाई पड़ती है।
रिटायर्ड फॉरेस्ट ऑिफसर जीएस सक्सेना का कहना है कि अगर पर्यटन विकास निगम इसे विकास के लिए अपने हाथ में ले तो हथाईखेड़ा से ज्यादा बेहतर इस क्षेत्र का विकास हो सकता है। यहां जंगल के बीच में इतना अच्छा पर्यटन केंद्र आसपास नहीं हो सकता।