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डाउनलोड करेंभोपाल। यहां न संवेदनाएं हैं, न सांत्वना और न सहानुभूति... यहां है तो सिर्फ लेटलतीफी, अव्यवस्था और इंतजार...। अंतिम संस्कार के लिए जल्दी पोस्टमार्टम कर शव देने की गुहार लगाते परिजन...। ये है हमीदिया अस्पताल की मर्चूरी, जहां लोगों को अपने नाते-रिश्तेदार का शव लेने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।
आंखों के सामने जवान बेटे का शव, लेकिन चाहकर भी उसे ले जाना उनके बस में नहीं। इसके लिए अभी उन्हें पांच घंटे और इंतजार करना था। हमीदिया की मर्चूरी में बेतरतीब पड़े शवों को देखकर कलेजा मुंह को आ रहा था, लेकिन कर्मचारियों और डॉक्टरों को कोई फिक्र नहीं थी।
यह दर्द सिर्फ रतलाम निवासी शिवदत्त शर्मा का ही नहीं है, बल्कि पोस्टमार्टम के लिए यहां आने वाले हर शख्स को अपने नाते-रिश्तेदार की मौत के बाद यूं ही सिसकना पड़ता है।शिवदत्त ने अपने जवान बेटे नवनीत को बीती 5 मई की रात इंदौर रोड स्थित लसूडिय़ा जोड़ के पास हुए सड़क हादसे में खो दिया। वह भोपाल के अशोका गार्डन क्षेत्र में किराए का मकान लेकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था।
शर्मा कहते हैं कि हमीदिया की मर्चूरी से बेटे का शव ले जाने के लिए उन्हें करीब १३ घंटे इंतजार करना पड़ा। इन तेरह घंटों में कोई जिम्मेदार ऐसा नहीं मिला, जो यह बता सके कि नवनीत की लाश आखिर कब हमारे हवाले की जाएगी।
पूछने पर एक ही जवाब... आप बाहर बैठे रहो
चिरायु अस्पताल में शुक्रवार रात करीब 9 बजे जवान बेटे सुरेंद्र तिवारी की मौत हो गई। उसे गोली मारी गई थी इसलिए डॉक्टरों ने शव पोस्टमार्टम के लिए हमीदिया अस्पताल भेज दिया।
रात मर्चूरी के सामने गुजारी। सुबह 10 बजे पुलिस के अधिकारी आए और पोस्टमार्टम शुरू हुआ दोपहर 1 बजे। अब तक बेटे की मौत को करीब 16 घंटे हो चुके थे। इस दौरान मर्चूरी के स्वीपरों से लेकर डॉक्टरों तक के सामने कई बार पोस्टमार्टम जल्दी करने की गुहार लगाई, पर हर बार एक ही जवाब, आप बाहर बैठो। यह दर्द है छतरपुर के राधारमण तिवारी का।
22 घंटे बीते, लेकिन शुरू नहीं हुआ पीएम
टिमरनी के रहटगांव में रहने वाली 23 साल की सुनीता घर में जल गई। उसके परिजन दोपहर 12 बजे उसे लेकर हरदा अस्पताल पहुंचे, जहां से उसे हमीदिया अस्पताल रैफर कर दिया गया। रास्ते में करीब 3 बजे होशंगाबाद के पास उसकी मौत हो गई। परिजनों ने शाम 6 बजे शव पोस्टमार्टम के लिए हमीदिया अस्पताल में रखवा दिया।
22 घंटे से ज्यादा समय बीत गया, लेकिन बेटी के शव का पोस्टमार्टम शुरू नहीं हो सका था। जलने के कारण शव से दुर्गंध आ रही थी, पर डॉक्टरों का दिल नहीं पसीज रहा था। यह कहना है मर्चूरी के सामने पोस्टमार्टम के बाद बेटी का शव लेने के लिए बैठे दिलीप और उसकी मां सावित्री का।
इसलिए होती है देरी
पुलिस पोस्टमार्टम रिक्वेस्ट फॉर्म भरकर गांधी मेडिकल कॉलेज की पांचवीं मंजिल पर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकोलीगल के काउंटर पर जमा करती है। इसके बाद फॉर्म ऑफिस में भेजा जाता है, जहां यह तय होता है कि कौन सा डॉक्टर उस शव का पोस्टमार्टम करेगा। इस दौरान यदि संबंधित डॉक्टर उपलब्ध हुए तो वह पीएम के लिए मर्चूरी आते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में करीब दो से तीन घंटे गुजर जाते हैं और परिजन इंतजार करते रहते हैं।
जबकि इंदौर में यह व्यवस्था
इंदौर स्थित फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रभारी डॉ. भरत वाजपेयी बताते हैं कि इंदौर में पोस्टमार्टम का समय सुबह ९ बजे से शाम 5 बजे तक रहता है। अवकाश के दिनों में 11 बजे से शाम ४ बजे तक किया जाता है। विशेष आदेश पर रात में भी पोस्टमार्टम किया जाता है। जबकि भोपाल में सुबह 11 बजे से शाम ५ बजे तक ही पोस्टमार्टम होता है।
देरी का असर ये भी
बिना अवकाश लिए साढ़े छह साल से लगातार पोस्टमार्टम कर लिम्का बुक में नाम दर्ज करवा चुके डॉ. वाजपेयी कहते हैं कि गृह मंत्रालय के मैनुअल में साफ लिखा है कि पोस्टमार्टम को प्राथमिकता दी जाए। गर्मी के दिनों में बॉडी का डी-कंपोजीशन रेट बढ़ जाता है। पोस्टमार्टम करने में जितनी देर होगी, बॉडी की फाइंडिंग्स नष्ट होती जाएंगी।
ऐसे सुधरेंगे हालात पीएम में अनावश्यक देरी न हो।
: परिजन शव जल्दी ले जाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें सही प्रक्रिया समझाने वाला कोई नहीं होता। मर्चूरी में एक जिम्मेदार अफसर की रेगुलर ड्यूटी लगाई जा सकती है, ताकि संवादहीनता न हो। : यहां धूप, बारिश और ठंड में खड़े परिजनों के बैठने की उचित व्यवस्था भी उनकी पीड़ा कम कर सकती है।
२२ घंटे बीते, लेकिन शुरू नहीं हुआ पीएम
टिमरनी के रहटगांव में रहने वाली 23 साल की सुनीता घर में जल गई। उसके परिजन दोपहर 12 बजे उसे लेकर हरदा अस्पताल पहुंचे, जहां से उसे हमीदिया अस्पताल रैफर कर दिया गया। रास्ते में करीब 3 बजे होशंगाबाद के पास उसकी मौत हो गई। परिजनों ने शाम ६ बजे शव पोस्टमार्टम के लिए हमीदिया अस्पताल में रखवा दिया।
22 घंटे से ज्यादा समय बीत गया, लेकिन बेटी के शव का पोस्टमार्टम शुरू नहीं हो सका था। जलने के कारण शव से दुर्गंध आ रही थी, पर डॉक्टरों का दिल नहीं पसीज रहा था। यह कहना है मर्चूरी के सामने पोस्टमार्टम के बाद बेटी का शव लेने के लिए बैठे दिलीप और उसकी मां सावित्री का।
मंत्री को शिकायत का इंतजार
॥हमीदिया की मर्चूरी में उन्हीं मरीजों के पीएम में ज्यादा वक्त लगता है, जिनमें विशेषज्ञ या अधिकारी की मौजूदगी जरूरी हो। अन्य शवों के पीएम 30 मिनिट से 1 घंटे में हो जाते हैं। अब तक किसी ने पीएम में देरी की शिकायत नहीं की है। महेंद्र हार्डिया, राज्य मंत्री, चिकित्सा शिक्षा
पीएम के लिए डॉक्टरों की रुचि कम होती जा रही है। डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने के अलावा मेडिकोलीगल इंस्टीट्यूट के लिए अलग से भवन भी तलाशा जा रहा है, जो हमीदिया के पास हो।ञ्जञ्ज
उमाशंकर गुप्ता, गृहमंत्री
पूछने पर एक ही जवाब... आप बाहर बैठे रहो
चिरायु अस्पताल में शुक्रवार रात करीब 9 बजे जवान बेटे सुरेंद्र तिवारी की मौत हो गई। उसे गोली मारी गई थी इसलिए डॉक्टरों ने शव पोस्टमार्टम के लिए हमीदिया अस्पताल भेज दिया। रात मर्चूरी के सामने गुजारी। सुबह 10 बजे पुलिस के अधिकारी आए और पोस्टमार्टम शुरू हुआ दोपहर 1 बजे। अब तक बेटे की मौत को करीब 16 घंटे हो चुके थे। इस दौरान मर्चूरी के स्वीपरों से लेकर डॉक्टरों तक के सामने कई बार पोस्टमार्टम जल्दी करने की गुहार लगाई, पर हर बार एक ही जवाब, आप बाहर बैठो।
यह दर्द है छतरपुर के राधारमण तिवारी का। पिछले कुछ दिनों में पोस्टमार्टम में इस तरह हुई देरी कब थाना क्षेत्र किसका बॉडी पहुंची पीएम के बाद मिली 5 मई कोहेफिजा सरजन सिंह सुबह 9 बजे दोपहर 3 बजे , 4 मई कोहेफिजा नौरंग बाई सुबह 10 बजे अगले दिन दोपहर 3 बजे, 30 अप्रैल बिलखिरिया आकाश त्यागी सुबह 9 बजे दोपहर 3:30 बजे,30 अप्रैल बिलखिरिया बाबू साहू सुबह 9 बजे दोपहर 3:45 बजे,यहां भी लगती है एप्रोच: मर्चूरी में शव का पीएम करवाने के लिए ज्यादातर लोगों को मशक्कत करनी पड़ती है।
लेकिन रसूख वालों के लिए सारे कायदे एक तरफ रख दिए जाते हैं। किसी बड़े अफसर या राजनेता की एप्रोच लगाने पर पोस्टमार्टम जल्दी कर दिया जाता है। अपनों को खोने का दर्द सहते लोगों को हमीदिया की मर्चूरी से शव लेने के लिए करना पड़ता है लंबा इंतजार
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