भोपाल. राजधानी में प्रस्तावित लाइट मेट्रो ट्रेन के ट्रैक और स्टेशन आदि बनाने के लिए फ्लाईओवर, ग्रेड सेपरेटर, फुट ओवरब्रिज (एफओबी) जैसे प्रोजेक्ट रोके जाएंगे। मेट्रो प्रोजेक्ट के रूट और डिजाइन में बाधा न बनने की स्थिति में ही ये प्रोजेक्ट आगे बढ़ेंगे। इसके लिए फिलहाल मेट्रो की डिटेल डिजाइन आने तक इंतजार करना होगा।
राज्य शासन ने हाल ही में लाइट मेट्रो ट्रेन की डिटेल डिजाइन बनने तक ऐसे सभी प्रोजेक्ट रोकने के आदेश दिए हैं। इसके चलते बीडीए ने बोर्ड ऑफिस चौराहे पर बनने वाले ग्रेड सेपरेटर को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। न्यू मार्केट में प्रस्तावित फ्लाईओवर और ग्रेड सेपरेटर के अलाइनमेंट को लाइट मेट्रो के रूट अलाइनमेंट से जांचा जा रहा है। वहीं, नगर निगम, हाउसिंग बोर्ड, पीडब्ल्यूडी और सीपीए ने भी अपनी योजनाओं की समीक्षा शुरू कर दी है।
फंड उपलब्ध कराने के लिए कंपनी को मंजूरी
भोपाल और इंदौर में लाइट मेट्रो का काम आगामी जुलाई में शुरू होकर समयसीमा में पूरा करने के लिए मप्र अरबन डेवलपमेंट कंपनी (एमपीयूडीसी) बनाए जाने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंगलवार को मंजूरी दे दी। यह कंपनी तमिलनाडु और कर्नाटक की तर्ज पर नगरीय निकायों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने के लिए फंड उपलब्ध कराएगी। इस कंपनी की शुरुआत 250 करोड़ रुपए के फंड से होगी। मंत्रिपरिषद की बैठक में अन्य महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए।
नई बनने वाली कंपनी के लिए 20 करोड़ रुपए राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जाने का फैसला लिया गया। इसके अलावा 45 करोड़ रुपए ब्रिटिश सरकार के डिपार्टमेंट फॉर इंटरनेशनल डवलपमेंट (डीएफआईडी) से मिलेगा।
इस तरह अन्य स्रोतों से कंपनी के कोष में करीब 250 करोड़ रुपए इकट्ठा होंगे, जिससे शहरी अधोसंरचना विकास के काम पूरे करने नगरीय निकायों को राशि उपलब्ध कराई जाएगी। एमपीयूडीसी कंपनी पूरी तरह से सरकार के नियंत्रण में रहेगी जो पीडब्ल्यूडी की विंग एमपीआरडीसी की तर्ज पर काम करेगी।
विभागों से मांगी प्रोजेक्ट की जानकारी
नगरीय प्रशासन संचालनालय ने सभी विभागों से भोपाल और इंदौर में वर्तमान में चल रहे और प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स की जानकारी मंगाई है। ऐसा इसलिए कि भले ही रूट में ये प्रोजेक्ट न आ रहे हों, लेकिन मेट्रो की दूसरी जरूरतों को पूरा करने के लिए जो जमीन चाहिए, उसकी अभी से प्लानिंग हो जाए। इसके चलते कुछ विभागों के रूट में न आने वाले प्रोजेक्ट भी अटक सकते हैं।
250 करोड़ रुपए के हैं ये प्रोजेक्ट
शहर में विभिन्न एजेंसियों के करीब 250 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट लाइट मेट्रो के रूट में आ रहे हैं। मेट्रो के बनने से इन्हें नुकसान न हो, इसलिए शासन ने यह कवायद की है। अफसरों के मुताबिक यदि एफओबी और फ्लाईओवर पहले बन जाएंगे, तो इन्हें मेट्रो के लिए तोड़ना होगा। इसलिए अभी से इन्हें रोककर नुकसान को कम किया जा रहा है। हालांकि एजेंसियां इन प्रोजेक्ट की डीपीआर में ही करीब चार करोड़ रुपए खर्च कर चुकी हैं।
अभी लाइट मेट्रो हमारी प्राथमिकता
रूट में आने वाले प्रोजेक्ट पर काम होने से लाइट मेट्रो की प्लानिंग बिगड़ेगी। वैसे भी लाइट मेट्रो के आने के बाद ट्रैफिक की दिक्कतें कम हो जाएंगी। अभी हमारी प्राथमिकता लाइट मेट्रो है।
कैलाश विजयवर्गीय, नगरीय विकास एवं पर्यावरण मंत्री
हमें विभाग का पत्र मिला था। इसके बाद हमने ग्रेड सेपरेटर की प्लानिंग रोककर उसे सूचित कर दिया है।'
कुमार पुरुषोत्तम, सीईओ, बीडीए
हम अपनी योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं। यदि यह लाइट मेट्रो के रूट में आ रही होंगी तो शासन को सूचना भेज देंगे।'
चंद्रमौलि शुक्ला, अपर आयुक्त, नगर निगम