भोपाल. सेकंड गॉड कहे जाने वाले डॉक्टर्स पूरी शिद्दत और ईमानदारी के साथ पेशेंट्स का ट्रीटमेंट करते हैं। पर्सनल लाइफ और दूसरे शौक से पहले अपने मरीजों की सेवा करना उनका पहला धर्म है। सिटी के ऐसे ही डॉक्टर्स का ग्रुप इन दिनों अपनी जिम्मेदारी के साथ थोड़ा समय मौज-मस्ती के लिए भी निकाल रहे हैं। बिट्टन मार्केट स्थित रविशंकर कम्युनिटी हॉल में सिटी के डॉक्टर्स अभिव्यक्ति गरबा महोत्सव की तैयारी कर रहे हैं।
डॉक्टर्स का मानना है कि वे गरबे में न सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए आ रहे हैं बल्कि इससे खुद को फिट रख रहे हैं। रिहर्सल क्लास में डॉक्टर्स के साथ फैमिली मेंबर्स, पेशेंट्स और दूसरे मेंबर्स भी गरबा की प्रैक्टिस कर रहे हैं। सिटी के इन डॉक्टर्स से सिटी भास्कर ने जाना कि किस तरह बिजी शेडयूल से वे टाइम निकालकर गरबा की प्रैक्टिस कर रहे हैं और गरबा प्रैक्टिस से कितना मेंटली और फिजिकली बेनीफिट मिलता है। रंग मिलन ग्रुप के ट्रेनर जय शिकारी ने बताया कि 30 डॉक्टर्स को यह ग्रुप इंटरेस्ट के साथ गरबा सीख रहा है।
बिल्टअप होता है स्टेमिना
डॉ. पीएन अग्रवाल ने कहा कि गरबे का सालभर मुझे और मेरी फैमिली को इंतजार रहता है। इससे एक ओर जहां हमें मेंटल रिलेक्सेशन मिलता है। वहीं, दूसरी ओर हमारा स्टेमिना भी बिल्टअप होता है।
क्लीनिक में साथ लेकर आते हैं ड्रेस
डॉ. मीनाक्षी टंडन ने बताया, ‘क्लीनिक में ज्यादा काम होने पर कभी-कभी गरबा क्लास के लिए लेट हो जाते हैं, इसलिए चेंजिंग ड्रेस क्लीनिक में साथ लेकर आते हैं। दरअसल, गरबा हमारे लिए एक्सरसाइज भी है।’
गरबा से बढ़ती है एफीशिएंसी
डॉ. नीलिमा अग्रवाल ने बताया, ‘गरबा करने से आपके काम में एफीशिएंसी बढ़ती है। मैं फैमिली के साथ रात 9 से 10 बजे के बैच में गरबा को एंजॉय कर रही हैं। गरबा करने से फ्रेश फील करती हूं।’
यूके में मिस करती थी गरबा
डॉ. श्रद्धा अग्रवाल ने कहा, ‘गरबा देखना और उसका पार्ट बनना, मेरे और फैमिली के लिए खास मूमेंट है। यूके में कल्चरल फेस्ट होते हैं, लेकिन अभिव्यक्ति गरबा महोत्सव का हिस्सा बनना खास है। मैं यूके में नवरात्रि और गरबा को मिस करती थी।’