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डाउनलोड करेंभोपाल. प्रवेश एवं शुल्क निर्धारण समिति पहली बार एक नई व्यवस्था शुरू करने जा रही है। इसके तहत कमेटी प्रोफेशनल कोर्सेस संचालित कर रहे निजी कॉलेजों का औचक निरीक्षण करेगी। इस दौरान कमी मिली तो वह कॉलेज के खिलाफ दस लाख रुपए तक का जुर्माना लगा सकेगी। इसी रिपोर्ट के आधार कॉलेजों की आगामी फीस भी तय होगी। अभी तक समिति कॉलेजों की फीस उनकी ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर तय करती आई है। निरीक्षण के बिंदु तय करने के लिए प्रोफार्मा तैयार किया जा रहा है।
इस व्यवस्था का मकसद कॉलेजों द्वारा मनमानी फीस वसूली पर रोक लगाना है। अधिकतर कॉलेज एडमिशन के समय अपने यहां तमाम सुविधाओं का झूठा दावा कर छात्रों से तय फीस से अधिक रकम वसूलते हैं। समिति के निरीक्षण से इस प्रवृत्ति पर रोक लग सकेगी। वह कॉलेज प्रबंधन को आदेश दे सकेगी कि वह छात्र को तय फीस से अधिक वसूली गई राशि वापस करे। समिति नियम विरुद्ध प्रवेश को अवैध घोषित कर सकेगी। वह कॉलेजों में होने वाले प्रवेश को रोकने तथा सीट घटाने के आदेश देने के साथ ही संस्था की मान्यता वापस लेने की सिफारिश भी कर सकेगी।
उच्च शिक्षा मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने हाल ही में प्रोफेशनल कोर्सेस की समीक्षा बैठक में ऐेसे कॉलेजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने समिति अध्यक्ष से साल में कम से कम एक बार निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों का निरीक्षण करने को कहा था। इसके बाद कमेटी ने नियम का उल्लंघन करने वाले कॉलेजों के खिलाफ सीधे तौर पर कार्रवाई करने की बात कही है। फीस कमेटी के ओएसडी सुनील कुमार गुप्ता का कहना है कि प्रदेश में मप्र निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्था (प्रवेश का विनियमन एवं शुल्क का निर्धारण) संशोधित एक्ट 2013 के बाद समिति को कॉलेजों के खिलाफ कार्रवाई के अधिकार मिल गए हैं। हालांकि वह कॉलेजों का निरीक्षण शुरू करने से पहले उन बिंदुओं को छांटेगी जो उसके दायरे में आएंगे।
फरवरी में होगी बैठक
निरीक्षण के लिए बिंदु तय करने का प्रस्ताव समिति की फरवरी के पहले या दूसरे सप्ताह में होने वाली बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। बैठक में ही छात्रों को शिकायत करने की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया जाएगा। ओएसडी गुप्ता के अनुसार सभी कॉलेजों में फीस कमेटी के सभी फोन नंबर, ई-मेल एड्रेस व हेल्पलाइन नंबर एक तय फार्मेट में नोटिस बोर्ड पर लगवाने का भी निर्णय लिया गया है। जानकारी के मुताबिक सत्र 2013-14 में ही कमेटी को कॉलेजों के खिलाफ छात्रों की 270 शिकायतें मिली थी जिनमें से 241 का निराकरण कर दिया गया है।
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