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सैटेलाइट इलेक्ट्रॉनिक आई की मदद से होगी बाघों की निगरानी

9 वर्ष पहले
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भोपाल। भोपाल के आस-पास के जंगलों में घूम रहे बाघों पर अब 24 घंटे निगरानी रखी जाएगी। इसके लिए वन विभाग सैटेलाइट इलेक्ट्रॉनिक आई की मदद लेगा। वन विभाग ने भोपाल के कलियासोत से लेकर रातापानी अभयारण्य तक पांच स्थानों का चयन किया है, जहां ये इलेक्ट्रॉनिक आई लगाई जाएंगी। भोपाल फॉरेस्ट सर्किल ने इस संबंध में प्रस्ताव राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) को भेजा है।
यदि प्रस्ताव को हरी झंडी मिलती है तो सैटेलाइट से बाघों की निगरानी करने के मामले में मप्र देश का दूसरा राज्य होगा। फिलहाल यह व्यवस्था अभी उत्तर प्रदेश के जिम कार्बेट नेशनल पार्क में लागू की गई है। भोपाल फॉरेस्ट सर्किल के सीसीएफ एसएस राजपूत ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक आई एक प्रकार का सर्विलांस वाइल्ड लाइफ ट्रैकिंग सिस्टम है। इसमें एक कैमरा होता है, जो सैटेलाइट व इंटरनेट से जुड़कर सीधे बाघ पर नजर रखेगा।
साढ़े तीन करोड़ रुपए होंगे खर्च
इस प्रोजेक्ट पर करीब साढ़े तीन करोड़ रुपए का खर्च आएगा। राजपूत के मुताबिक असंरक्षित वन क्षेत्र के लिए इस तरह का प्रस्ताव पहली बार तैयार किया गया है। चूंकि रातापानी अभयारण्य में बाघों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। साथ ही बल बहुत कम है, इसलिए ये सिस्टम लगाना जरूरी है ताकि बाघों की निगरानी और बेहतर तरीके से की जा सके।
कैमरे की दिशा भी बदल सकेंगे
राजपूत ने बताया कि सर्विलांस वाइल्ड लाइफ ट्रैकिंग सिस्टम में पांच कैमरों का उपयोग किया जाएगा। ये कैमरे सातों दिन 24 घंटे चालू रहेंगे। कैमरे में बैटरी की आपूर्ति के लिए जीपीआरएस प्वॉइंट पर सोलर एनर्जी पैनल लगाए जाएंगे। इसके लिए कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। वन विभाग के कर्मचारी कंट्रोल रूम में बैठकर ही रिमोट कंट्रोल से कैमरे की दिशा बदल सकते हैं।