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साक्षात्कार: हवाई सेवाओं के माध्यम से रीजनल कनेक्टिविटी पर जोर

7 वर्ष पहले
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भोपाल. विमानन मंत्री अशोक गजपति राजू देश में रीजनल कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दे रहे है। राज्यों से सहयोग लेने से भी उन्हें परहेज नहीं है| इसी सिलसिले में वे गुरुवार को कई निजी एवं सरकारी कंपनियों के अधिकारियों के साथ भोपाल आए।
 
दैनिक भास्कर ने उनसे बातचीत कर एयर कनेक्टिविटी को लेकर किए जा रहे प्रयासों के बारे में जानने की कोशिश की। आप रीजनल और रिमोट कनेक्टिविटी बढ़ाने पर काफी जोर दे रहे हैं, क्या यह सार्थक हो रहा है?

यह हमारी सरकार की यह प्राथमिकता है। भारत जैसे बड़े देश में कनेक्टिविटी की जरूरत भी है। हम इसके वित्तीय पहलू पर भी विचार कर रहे हैं क्योंकि एयर कनेक्टिविटी सस्ते में तो नहीं आती। हमारे सामने काफी चैलेंज है, जिन्हें हम स्टेकहोल्डर्स से विचार विमर्श करके दूर करने की कोशिश भी कर रहे हैं। 
 
पर निजी क्षेत्र की कंपनियां तो इसका विरोध कर रही है? 

निजी क्षेत्र इसका विरोध नहीं कर रहा, बल्कि इस बात से चिंतित जरूर है कि कुछ जगह पर विमान उड़ाना उनके लिए नुकसान का सौदा होगा। हम निजी क्षेत्र की केयर भी बच्चों की तरह कर रहे हैं और उन्हें अधर में नहीं छोड़ेंगे। 
 
एयर इंडिया की तर्ज पर निजी कंपनियों को भी सब्सिडी देंगे? 

एयर इंडिया को सरकार ने कोई पैकेज नहीं दिया बल्कि वित्तीय संस्थाओ ने दिया है। निजी कंपनियों को भी इसी राह पर चलना चाहिए। वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) के जरिये इस समस्या को सुलझाया जा सकता है। 
 
विमानन क्षेत्र में नई नीति आ रही है? क्या ख़ास है इस नीति में? 

दूरवर्ती एवं द्वितीय तथा तृतीय श्रेणी के शहरों से उड़ान काे बढ़ावा देने के लिए निजी कंपनियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रिमोट एंड रीजनल एरिया एयर कनेक्टिविटी नीति बनाई जा रही है। इससे जुड़ी नीति का संशोधित प्रारूप तैयार कर लिया गया है और संबंधित पक्षों के साथ उस पर विचार विमर्श किया जा रहा है। 
 
राज्य सरकारों से आपकी क्या अपेक्षाएं हैं? 

राज्य सरकारों से रनवे एक्सटेंशन या एयरपोर्ट पर किसी तरह का सपोर्ट बनाने के लिए जमीन मांगी जाएगी। इसके अलावा उनसे एयरपोर्ट्स को म्यूनिसिपल चार्ज से मुक्त करने को भी कहा जा सकता है| इसके अलावा राज्यों को नॉन-प्रॉफिटेबल रूट्स पर ऑपरेट करने को तैयार एयरलाइंस की कुछ पर्सेंटेज सीटों को अंडरराइट करना होगा।