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डाउनलोड करेंभोपाल। बड़वानी जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के कार्यों में गड़बडिय़ां करने वाले 13 इंजीनियरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इनसे 9.44 करोड़ रुपए की वसूली भी होगी। जांच में प्रथमदृष्टया दोषी पाए गए इन इंजीनियरों ने वर्ष 2010-11 से लेकर 2012-13 के बीच करोड़ों रुपए की आर्थिक अनियमितता की। बड़वानी जिले में हुए घोटाले में अब तक 28 इंजीनियरों पर कार्रवाई हो चुकी है।
मप्र रोजगार गारंटी परिषद आयुक्त रवींद्र पस्तोर ने बड़वानी कलेक्टर से कहा है कि वह इंजीनियरों के खिलाफ तत्काल पुलिस कार्रवाई करें। गौरतलब है कि विभाग ने प्रत्येक पंचायत में तीन लाख रुपए से अधिक की लागत से हुए 399 कार्यों की जांच कराई थी। निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन करााकर गुणवत्ता परखी गई थी। इसमें खुलासा हुआ कि इंजीनियरों ने सरकारी धन का दुरुपयोग किया।
इन पर हुई कार्रवाई
जिन इंजीनियरों पर कार्रवाई हुई है उनमें सहायक यंत्री एनएम श्रीवास्तव, प्रभारी सहायक यंत्री बीएल भावेल, सहायक यंत्री केसी अग्रवाल, उपयंत्री बीएल भावेल, उपयंत्री आरके गुप्ता, उपयंत्री शिवसिंह सोलंकी, संविदा उपयंत्री आनंद डाबर, मुकेश वास्कले, शिवशंकर सिंह, प्रदीप मुजाल्दे, रचना शितोले (हिरवे), सुरपाल डॉबर तथा उमा नरवरिया शामिल हैं। एफआईआर दर्ज कराने से पहले इन इंजीनियरों की सेवाएं मूल विभाग को वापस कर दी गई हैं।
52 लाख जॉबकार्ड धारियों के नाम अब एमआईएस से भी हटेंगे
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग 52,72,155 जॉब कार्ड धारियों के नाम अब एमआईएस (मैनेजमेंट इनफॉर्मेशन सिस्टम) से भी हटाने जा रही है। इन निष्क्रिय जॉब कार्डों को पहले ही निरस्त कर दिया गया है। एमआईएस से हटने के बाद क्रियाशील जॉब कार्डों की संख्या 67 लाख 39 हजार 612 रह जाएगी।
बड़वानी कलेक्टर हाईकोर्ट में तलब
करोड़ों के मनरेगा घोटाले मामले में बड़वानी कलेक्टर श्रीमन शुक्ला हाईकोर्ट की इंदौर बैंच में हाजिर हुए। कोर्ट ने उन्हें गुरुवार को शपथ-पत्र के साथ हाजिर होने के आदेश दिए। बड़वानी में छह करोड़ के मनरेगा घोटाले में इंजीनियर, सब इंजीनियर सहित 16 कर्मियों को हटा दिया गया है। इसके खिलाफ दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई में अदालत ने यह सवाल उठाया था कि इतने बड़े घोटाले में छोटे कर्मियों पर तो कार्रवाई हो गई किंतु बड़े अफसरों की उसमें क्या भूमिका थी और उन पर क्या कार्रवाई की गई?
बुधवार को जस्टिस एनके मोदी व जस्टिस एमसी गर्ग की डिविजन बैंच के समक्ष अतिरिक्त महाधिवक्ता मनोज द्विवेदी ने बताया कि हटाए गए कर्मी संविदा नियुक्ति पर थे और उन्हें 31 मार्च 2013 के पहले ही हटा दिया गया था। इसलिए उन्हें सस्पेंड करने का सवाल ही नहीं उठता।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता पीयूष माथुर व मनोज मानव ने कहा कि- 31 मार्च को हटा दिया गया था तो 6 अप्रैल 13 को उन्हें हटाने संबंधी नोटिस कैसे मिला। इस पर अदालत ने कलेक्टर से कहा- यह बात गुरुवार को शपथपत्र के साथ कोर्ट में हाजिर होकर कहें।
॥इंजीनियरों के खिलाफ एफआईआर के लिए कलेक्टर बड़वानी को लिखा है। साथ ही कुछ राशि की वसूली भी की जानी है। जांच में प्रथम दृष्टया ये इंजीनियर दोषी पाए गए हैं। रवींद्र पस्तोर, आयुक्त, मप्र रोजगार गारंटी परिषद
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