भोपाल. मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपी पीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में हर साल हजारों उम्मीदवार परीक्षा में शामिल होने के लिए अपात्र घोषित हो रहे हैं। परीक्षा के लिए तय आयु सीमा में विसंगति होने की वजह से ऐसा हो रहा है।
एमपी पीएससी जिस वर्ष के लिए परीक्षा आयोजित करता है, उसके लिए तय आयु सीमा अगले साल की एक जनवरी तक पूरी होने वाली उम्र को माना जाता है। इससे कई उम्मीदवार एक साल ज्यादा उम्र हो जाने की वजह से परीक्षा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं।
यह विसंगति तब सामने आई जब एक उम्मीदवार ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में की। नियमों की वजह से परेशानी सामने आने के बाद अब एमपी पीएससी संबंधित विभागों की नियम बनाने की जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ रहा है।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में की गई शिकायत में व्यापमं द्वारा आयोजित की जा रही राजस्व निरीक्षक भर्ती परीक्षा और मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की उच्च न्यायिक सेवा परीक्षा का हवाला दिया गया है। इन दोनों ही परीक्षाओं के लिए तय आयु सीमा चालू वर्ष की ही पहली जनवरी तक पूरी होने वाली उम्र को माना गया है।
एमपी पीएससी के आयु सीमा नियमों में संशोधन न होने पर आगे भी इसी तरह हजारों उम्मीदवारों के परीक्षा से वंचित होने की आशंका जताई जा रही है। इससे पहले भी मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा लंबे अंतराल में सिविल सेवा परीक्षा आयोजित नहीं कराने पर हजारों उम्मीदवार आयु सीमा पार कर चुके हैं।
सचिव ने कहा-आयोग नहीं बनाता नियम
एमपी पीएससी के सचिव मनोहर दुबे का कहना है कि परीक्षाओं के नियम आयोग नहीं, बल्कि वे संबंधित विभाग बनाते हैं जिनके लिए परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं। आयोग का काम केवल नियमों के तहत परीक्षाएं कराना है। यही बात व्यापमं संचालक तरुण पिथोड़े ने भी दोहरायी है। व्यापमं संचालक के अनुसार संबंधित विभाग सारे नियम बनाकर जारी करते हैं।