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मशहूर कवि अशोक चक्रधर और सूर्य कुमार पांडेय पहुंचे भोपाल, सुनाई कविताएं

वे भारत भवन में गुरुवार को आयोजित रचनापाठ में हिस्सा लेने भोपाल पहुंचे।

Dainik Bhaskar

Mar 27, 2015, 05:44 AM IST
famous poet Ashok Chakradhar and reached Bhopal Surya Kumar Pandey
भोपाल. 'हंसना जितना आसान है, हंसाना उतना ही मुश्किल काम है...'। यह कहना है मशहूर कवि अशोक चक्रधर और कवि सूर्य कुमार पांडेय का। वे भारत भवन में गुरुवार को आयोजित रचनापाठ में हिस्सा लेने भोपाल पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने सिटी भास्कर से खास बातचीत की।
आजकल तो तुकबंदी का ही चलन है। इधर-उधर से शब्द उठाया, तुक मिलाया और कविता बन गई। आप इस बारे में क्या कहते हैं?
मैं तो यही कहूंगा कि आजकल के कवि तो तुक मिलाने की इतनी जहमत भी नहीं उठाते। उनके शब्दकोष में सिर्फ चुटकुलेबाजी है। पहले फिल्मी गानों में भी तुकबंदी होती थी, लेकिन अब वहां भी तुक मिलाने की बजाय ताल और लय पर अधिक ध्यान दिया जाता है।
जब आप दुःखी या उदास होते हैं, तब लोगों को हंसाना आपके लिए कितना मुश्किल होता है?
देखिए, मेरा उद्देश्य हंसाना नहीं होता है, बल्कि हंसी के बहाने फंसाना होता है और इसी तरह समाज की उन विकृतियों को सामने लाना होता है, जो अगर सुधर जाए तो हमारा देश सुखी व खुशहाल हो जाए और हमें सचमुच की हंसी आए। मुझे हंसी पैदा करनी पड़ती है। मैं दूसरे लाफ्टर कलाकारों की तरह कोई जन्मजात हंसोड़ नहीं हूं। हां , कविता प्रस्तुतिकरण का मेरा ढंग ऐसा होता है कि गंभीर से गंभीर कविता में भी लोग हंस पड़ते हैं। मैं तो हमेशा यही चाहता हूं, हम सभी हमेशा हंसते रहें।

दिल को छू जाए, मन में उतर जाए वो कवि है...
पिछले लगभग 48 सालों से साहित्य साधना में संलग्न हास्य कवि सूर्य कुमार पांडेय उन विरल कवियों में एक हैं जिन्होंने हास्य-व्यंग्य कविता मंच को चुटकुलेबाजी के प्रदूषण से मुक्त रखने में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आपके अनुसार हास्य क्या है? हास्य और व्यंग्य में मूलभूत अंतर क्या होता है?
हास्य है निर्मल आनंद का वो क्षण जो आपके शरीर में एक ऐसी भौतिक-रासायनिक प्रतिक्रिया पैदा करता है, जिससे आपकी देह पूरी आनंदित हो जाती है। उसमें सोच बहुत ज्यादा शामिल नहीं होती है वो निर्मल व्यंग्य होता है। यदि हम व्यंग्य की बात करें तो व्यंग्य करुणाजन्य होता है। उसके पीछे दुःख की कोई न कोई वजह जरूर होती है। हास्य अकारण कहीं भी आ सकता है लेकिन व्यंग्य के पीछे कोई कारण होना चाहिए और कारण के पीछे करुणा होनी चाहिए। मेरा मानना है कि किसी को हंसाना बेहद कठिन काम है।
आप क्या मानते हैं कि एक अच्छा कवि होने के लिए व्याकरण का ज्ञान होना ज्यादा जरूरी है?
मेरे अनुसार व्याकरण के ज्ञान के बजाय कवि में अंत:करण का ज्ञान होना चाहिए। यदि आप किसी के हृदय में नहीं उतर सकते, किसी के मन में उठती तरंगों, हृदय की हलचलों आदि को नहीं जान सकते, तो आप कभी अच्छे साहित्यकार नहीं हो सकते हैं। व्याकरण तो बहुत ऊपर की चीज है।
famous poet Ashok Chakradhar and reached Bhopal Surya Kumar Pandey
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