(पार्षद मनीष यादव की पत्नी डॉली यादव, कांग्रेस नेता तुफैल सिद्दीकी की पत्नी नाजमा, पार्षद महेंद्र परमार की पत्नी पुष्पा परमार)
भोपाल. नगर निगम चुनाव के लिए 85 वार्डों में से 42 वार्ड सिर्फ महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित किए जाने से दोनों ही प्रमुख पार्टियों ने महिला उम्मीदवारों की तलाश शुरू कर दी है। इसे देखते हुए आरक्षण से पहले इन वार्डों से टिकट की दावेदारी जता रहे नेता अब अपनी पत्नियों के लिए टिकट मांग रहे हैं। इसके बावजूद महिला उम्मीदवारों की कमी बनी हुई है। आरक्षण की चपेट में आने वाले वर्तमान पार्षद तो पत्नियों के लिए चुनावी जमीन तैयार करने में जुट गए हैं। हालांकि भाजपा में अभी इस बारे में प्रदेश कार्यालय से गाइडलाइन आने का इंतजार किया जा रहा है। इसलिए नेता अपनी पत्नियों के नाम खुलकर नहीं रख रहे हैं। जबकि जिला कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेसी पार्षदों ने पत्नियों के बायोडाटा भी भिजवा दिए हैं।
उत्तर, गोविंदपुरा, नरेला और हुजूर विधानसभा में सबसे ज्यादा 32 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हुई हैं। दोनों दलों के सामने यह संकट है कि किस महिला कार्यकर्ताओं को टिकट दिया जाए। फिर भी नेताओं ने समीकरणों के हिसाब से टिकट के दावे पेश करना शुरू कर दिए हैं। कुछ ने अपनी पत्नियों की बजाय दूसरे वार्ड से दावेदारी जताई तो कुछ अपनी पत्नियों को ही चुनाव लड़वाना चाहते हैं।
फिर भी पत्नियों को ही चुनाव लड़वाएंगेे
वार्ड 20 अनारक्षित हैं, लेकिन यहां से कांग्रेस नेता अतुल कौशल दोबारा अपनी पत्नी ओर वर्तमान पार्षद स्वाति कौशल को ही चुनाव लड़वाना चाहते हैं। जबकि वार्ड एक से शमीम नासिर, वार्ड 20 से राजेंद्र कौर और वार्ड 79 ममता तिवारी आदि महिला पार्षद दोबारा किस्मत आजमाने की तैयारी कर रही हैं। यहां भी आरक्षण न होने के बाद भी पार्षद पतियों ने अपनी पत्नियों पर ही भरोसा जताया है।
इन्होंने पत्नियों को चुनाव लड़ाने से किया इंकार
एमआईसी सदस्य पंकज चौकसे, किशन सूर्यवंशी ने अपने वार्ड आरक्षित होने के बाद यहां से अपनी पत्नियों को चुनाव लड़ाने से मना कर दिया है। दोनों ही अब पार्टी से दूसरे वार्ड से टिकट चाह रहे हैं। वहीं, कांग्रेस से पार्षद शाहिद अली और गिरीश शर्मा भी दूसरे वार्डों से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। शर्मा के मौजूदा वार्ड 62 को नए परिसीमन में तीन हिस्सों में बांटा गया है। ऐसे में उनके पास नए वार्ड 66 के आरक्षित होने के बाद भी वार्ड 65 से चुनाव लड़ने का विकल्प है।
दोबारा लड़ेंगी चुनाव
वार्ड 16 से निशा खान, वार्ड 24 से शबिस्ता सुल्तान, वार्ड 60 से निर्मला मोरे, वार्ड 40 से चांद बी शमीम आदि महिला पार्षदों को फिर से चुनाव लड़ने का मौका मिल सकता है। यहां के वार्ड फिर से महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। कुछ वार्डों से भी महिला नेत्रियां दावेदारी कर सकती हैं।
अब खुद लड़ेंगे चुनाव
पिछले चुनाव में वार्ड 50 के आरक्षित होने पर कांग्रेस नेता राजू नरवड़े ने पत्नी शोभा को चुनाव लड़वाया था। वे जीत भी गई थीं। इसी तरह वार्ड 51 से पार्षद बबली माली के भी दोबारा चुनाव लड़ने की संभावना नहीं है। इस बार उनके पति और भूपेंद्र माली टिकट की दावेदारी कर रहे हैं।
सक्रिय हैं तो मिलेगा टिकट
हर वार्ड की समीक्षा कर रहे हैं। प्राथमिकता जीतने वाले उम्मीदवार की है। महिला टिकट के लिए महिला कांग्रेस में उम्मीदवार की सक्रियता देखी जाएगी। यदि नेताओं की पत्नियां क्षेत्र में सक्रिय हैं तो उन्हें टिकट देने में हर्ज क्या है? पीसी शर्मा, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस
गाइडलाइन के बाद फैसला
हमारे पास महिला कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या है। वरिष्ठ नेताओं से चर्चा कर टिकट का फैसला किया जाएगा। नेताओं की पत्नियों को टिकट देने या न देने का फैसला गाइडलाइन आने के बाद होगा। आलोक शर्मा, जिलाध्यक्ष, भाजपा