भोपाल. शहर की सड़कों पर फर्राटा भरती टू और फोर व्हीलर्स के बीच साइकिल पर घूमतीं बिंदास और अपनी मस्ती में मस्त दो लड़कियां बरबस ही लोगों का ध्यान खींच लेती हैं।
पढ़ाती हैं गरीब बच्चों को
जर्मनी से आईं 19 साल की एली और 20 साल की जेनी शहर के स्लम एरियाज के बच्चों को एजुकेशन दे रही हैं। दोनों छोटे-बड़े कामों के लिए बाइक या कार के बजाय साइकिल का इस्तेमाल करती हैं। इस तरह वे लोगों को साइकिल चलाकार फिट रहने और पर्यावरण के प्रति अवेयर कर रही हैं।
महंगी ट्रांसपोर्ट सर्विस के कारण खरीदी पुरानी साइकिल
जेनी ने बताया कि भोपाल आने पर यहां की ट्रांसपोर्ट सर्विस काफी महंगी लगी। इसके कारण उन्होंने एक पुरानी साइकिल खरीदी। इसे नया लुक देते हुए फेवरेट कलर में रंगा और एक्सेसरीज लगाकर इसे चलाने लायक बनाया। एनी और जेनी एक ही साइकिल से स्लम एरियाज के बच्चों को शिक्षा देने जाती हैं। इसके साथ ही वे शॉपिंग या आउटिंग के लिए भी साइकिल का इस्तेमाल करती हैं।
दोनों लड़कियों को पसंद है भोपाल की तहजीब और भारत की संस्कृति
एली बताती हैं कि 'भोपाल में साइकिलिंग करने में किसी तरह की परेशानी नहीं होती है। हां, राह चलते लोग हमें हैरानी से जरूर देखते हैं, लेकिन इस बात का उन्हें बुरा नहीं लगता।' वहीं, जेनी कहती हैं, 'भारत की संस्कृति काफी अलग और
खूबसूरत है। इसकी हर एक बात मुझे अच्छी लगती है।' दोनों भारतीय संस्कृति खासकर भोपाल की तहजीब को पसंद करती हैं। इसलिए वे यहां के रंगरूप में ढलने लगी हैं। यहां के कल्चर से प्रभावित होकर वे पायल, बिंदी जैसी सामग्री कैरी करने लगी हैं। धीरे-धीरे उन्हें इंडियन फैशन कंफर्टेबल लगने लगा है।
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