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डाउनलोड करेंभोपाल। पिछड़ा वर्ग के गल्र्स हॉस्टल्स में शाम पांच बजे के बाद कोई भी अफसर निरीक्षण नहीं कर सकेगा। इतना ही नहीं, विभाग के असिस्टेंट डायरेक्टर और प्रिसिंपल से नीचे के किसी भी अफसर को निरीक्षण का अधिकार नहीं होगा। निरीक्षण से पहले हॉस्टल अधीक्षिका को सूचना देना होगी। छात्राओं की सुरक्षा के मद्देनजर इस संबंध में हाल ही में यह निर्देश जारी किए गए हैं। इनमें कहा गया है कि गल्र्स हॉस्टल्स में अब बिना अनुमति के सांसद, विधायक, पार्षद अथवा अन्य कोई जनप्रतिनिधि नहीं जा सकेंगे।
मंत्रालय सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार ने संभागीय मुख्यालयों में 10, जिला मुख्यालय में पांच और प्रत्येक तहसील मुख्यालय में दो हॉस्टल्स भवन किराए पर लेकर नई योजना शुरू की है, जिसमें सिर्फ पिछड़ा वर्ग के पोस्ट मैट्रिक छात्र-छात्राएं पोस्ट ग्रेज्युएशन तक की पढ़ाई करने के लिए रह सकेंगे। इन हॉस्टल्स में रहने के लिए छात्र-छात्राओं को एक शपथ-पत्र भी देना होगा, जिसमें बताना होगा कि वे हॉस्टल द्वारा उपलब्ध बिजली, पानी एवं आवास का दुरुपयोग नहीं करेंगे। साथ ही यह लिखकर देना होगा कि वे हीटर, प्रेस, कूलर, आदि का उपयोग नहीं करेंगे।
ये अनिवार्यता भी होगी
क्चगल्र्स हॉस्टल्स में महिला को ही अधीक्षिका रखा जाए और उसकी गैर हाजिरी में प्रभारी भी महिला ही हो।
क्चचतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी महिला ही होगी यदि पुरुष चौकीदार हो तो वह प्रौढ़ हो।
क्चगल्र्स हॉस्टल्स में चहार-दीवारी कंटीले तारों की फेंसिंग से हो। हॉस्टल्स में रात्रि में प्रकाश की समुचित व्यवस्था होगी और बिजली खराब होने अथवा पॉवर कट होने के समय अतिरिक्तरुप से इमरजेंसी लाईट की व्यवस्था अनिवार्य रखी जाएगी।
.. तो सरकार देगी किराया
पिछड़ा वर्ग विभाग के मंत्री अजय विश्नोई ने बताया कि हॉस्टल की समस्या से निपटने के लिए एक अन्य योजना शुरू की गई है, जिसमें कम से कम पांच विद्यार्थी मिलकर एक मकान किराए पर ले सकते हैं, जिसका किराया राज्य सरकार वहन करेगी। इसके लिए तहसील में 3 हजार, जिला मुख्यालय में 4 हजार और संभागीय मुख्यालय में 5 हजार रुपए प्रतिमाह तक का किराया निर्धारित किया गया है। विश्नोई का कहना है कि अब प्रदेश के किसी भी जिले में हॉस्टल की समस्या नहीं है।
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