भोपाल. मुख्यमंत्री
शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर अपने पांच साल पुराने फार्मूले को दोहराने जा रहे हैं। वे दो दिन तक मंत्रिमंडल के 24 सदस्यों तथा 200 से अधिक आईएएस, आईपीएस, आईएफएस व अधीनस्थ अफसरों के साथ मंथन करेंगे, ताकि आगामी पांच वर्षों में जनता को योजनाओं का लाभ मिले और गवर्नेंस में सुधार हों। इस दौरान गवर्नेंस में नई तकनीक के उपयोग पर जोर होगा।
मुख्यमंत्री ने पिछले कार्यकाल की शुरुआत में वर्ष 2009 में भी ऐसा ही मंथन किया था। जानकारी के अनुसार 26 और 27 सितंबर को प्रशासन अकादमी में होने वाले ‘मंथन-2014’ में अन्य विषयों के साथ योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और लोक सेवा प्रदाय गारंटी को प्रभावी बनाए जाने पर जोर रहेगा।
इस दौरान अधिकारी अपने अनुभवों के आधार उन कमियों पर भी ध्यान आकर्षित करेंगे, जिसके कारण जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इनके निराकरण के उपायों से भी वे सरकार को अवगत करवाएंगे। मंत्रियो और अफसरों के अलावा इसमें नगरीय निकाय और पंचायत के उन लोगों को भी जोड़ा जाएगा, जिन्होंने अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया है।
सात अलग अलग विषयों पर अधिकारियो की टीम बनेंगी और हर अधिकारी को प्राथमिकता के आधार पर तीन विकल्प देने होंगे। इन टीमों का नेतृत्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी करेंगे। मंथन के लिए पुलिस महानिदेशक और प्रधान मुख्य वन संरक्षक से भी दस-दस आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों के नाम भेजने को कहा गया है।
क्या स्थितियां अभी भी नहीं सुधरी?
मंथन को लेकर प्रशासनिक स्तरों पर सवाल उठ रहे हैं कि प्रदेश में पिछले दस वर्षों से भी अधिक समय से भाजपा की सरकार है। शिवराज सिंह तीसरी बार मुख्यमंत्री बने हैं। वे विभागों की समीक्षाएं लगातार कर रहे हैं। वीडियो कांफ्रेंसिंग हो रही हैं। समाधान ऑनलाइन के अलावा डायल 181 के जरिए भी जनता की समस्याएं सुलझाई जा रही हैं। इस सबके बावजूद मंथन का आयोजन इस बात की ओर इशारा करता है कि सिस्टम में अभी और सुधार की आवश्यकता है।
योजनाएं और लीडर
हितग्राही मूलक योजनाएं (अरुणा शर्मा), अधोसंरचना निर्माण एवं संधारण (आरएस जुलानिया), स्वास्थ्य/शिक्षा/सार्वजनिक वितरण प्रणाली संबंधी सेवाएं (एसआर मोहंती), नियामक सेवाएं (बीपी सिंह), प्रशासनिक सुधार (आईएस दाणी), वित्तीय संसाधनों को बढ़ाना तथा संसाधनों का ऑप्टिमम उपयोग (अजय नाथ) और आधुनिक तकनीक का उपयोग (एमएम उपाध्याय)।