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एक फोन आया... और दौड़ पड़ी नोटशीट, आधे घंटे में तबादला

9 वर्ष पहले
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भोपाल। राज्य शासन ने भोपाल नगर निगम कमिश्नर रजनीश श्रीवास्तव का मंगलवार को आनन-फानन में वल्लभ भवन तबादला कर दिया। माना जा रहा है कि महापौर कृष्ण् गौर और भाजपा संगठन से पटरी न बैठा पाने की वजह से उनका तबादला हुआ है।

सब कुछ आम दिन की तरह था। खुद नगर निगम कमिश्नर रजनीश श्रीवास्तव सभी बातों से बेफिक्र नगरीय प्रशासन आयुक्त संजय शुक्ला से मिलने संचालनालय गए हुए थे। तभी शाम साढ़े छह बजे वल्लभ भवन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास एक फोन पहुंचा। वे उस वक्त विधायकों और मंत्रियों से मुलाकात कर रहे थे। उन्होंने तत्काल मुख्य सचिव आर. परशुराम को निगम कमिश्नर के तबादले की नोटशीट चलाने के निर्देश दिए।

महज आधे घंटे में नोटशीट सामान्य प्रशासन विभाग से मुख्य सचिव के पास पहुंच गई। मुख्य सचिव ने भी बिना कोई देर किए श्रीवास्तव के तबादले का आदेश निकाल दिया। मामले की गंभीरता इसी से समझी जा सकती है कि राज्य सरकार इतना भी वक्त नहीं ले पाई कि निगम में उनके स्थान पर किसी दूसरे अधिकारी की पदस्थापना कर सके।

यही नहीं, खुद मुख्य सचिव ने तबादला आदेश जारी किया है। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश भाजपा संगठन श्रीवास्तव की कार्यशैली से खफा था। सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर थी कि कमिश्नर ने गैमन इंडिया जैसे बड़े मामले में भी गंभीरता नहीं दिखाई।

वहीं, पिछले एक साल में निगम में भ्रष्टाचार के बढऩे से पार्टी की छवि भी खराब हो रही थी। इससे संगठन चिंतित था। सूत्र बताते हैं कि इस बारे में खुद सांसद कैलाश जोशी और भाजपा जिला अध्यक्ष आलोक शर्मा मुख्यमंत्री से शिकायत कर चुके थे। मंगलवार को संभवत: श्री जोशी ने ही मुख्यमंत्री को फोन किया था। जबकि, महापौर कृष्णा गौर और निगम कमिश्नर के मतभेद पहले सार्वजनिक हो चुके थे। महापौर ने महज एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री से मिलकर इस संबंध में शिकायत कर उन्हें हटाने के लिए आग्रह किया था।


ये रहीं मुख्य वजहें

भाजपा संगठन की नाराजगी, कांग्रेस को मदद करने का आरोप।
गैमन इंडिया मामले में जब राज्य सरकार पर तमाम आरोप लग रहे थे, तब नगर निगम ने इसमें नकारात्मक भूमिका अदा की।

निगम में आर्थिक अनियमितताओं की शिकायतें बढऩा, महापौर के साथ तालमेल न करना।

सांसद कैलाश जोशी और भाजपा जिला अध्यक्ष से भी पटरी न बैठा पाना, परदे के पीछे गैमन इंडिया

जब गैमन इंडिया के मामले में राज्य सरकार की किरकिरी हो रही थी, तब निगम कमिश्नर ने इस मामले में गंभीरता नहीं बरती। पहले नर्मदा कर ज्यादा लगाया, फिर इसे कम कर दिया। बाद में फिर बढ़ा दिया गया। इससे गैमन इंडिया प्रबंधन नाराज था। उन्होंने निगम की गणना को गलत बताते हुए हाईकोर्ट का रुख कर लिया, जहां से फिलहाल उसे राहत मिली हुई है। गैमन इंडिया ने सीएम और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर प्रदेश से निवेश वापस लेने की भी चेतावनी दी थी।

इधर, जोड़-तोड़ शुरू
सूत्र बताते हैं कि मुरैना के जिला पंचायत सीईओ विनोद शर्मा और पूर्व में ननि कमिश्नर रह चुके एमबी ओझा का नाम कमिश्नर पद की दौड़ में सबसे आगे है। शर्मा के लिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और महापौर ने रुचि दिखाई है। इसके अलावा शहर के वर्तमान एडीएम उमाशंकर भार्गव का नाम भी चर्चा में है।

विकास कार्यों पर लगा था ब्रेक

श्रीवास्तव ने फरवरी 2012 में निगम कमिश्नर का पद संभाला था। कुछ समय तो उनके और मेयर के बीच तालमेल ठीक रहा, लेकिन फिर स्थिति बिगड़ गई। तब से जेएनएनयूआरएम, एडीबी, बीआरटीएस समेत कई विकास कार्य पिछड़ गए थे।