भोपाल. हत्या के प्रयास के आरोप में जेल में बंद कोलार निवासी वीरू राठौर की बुधवार रात हमीदिया अस्पताल में मौत होने से आक्रोशित परिजनों ने गुरुवार को कोलार थाने के सामने धरना दिया। शाम पांच बजे के बाद मेन रोड पर वीरू का शव रखकर चक्काजाम भी किया। इस दौरान पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारे भी लगाए। मौके पर पहुंचे अपर कलेक्टर की समझाइश के बाद चक्काजाम खत्म हुआ।
करीब आधे घंटे तक कोलार में सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन कर रहे परिजनों ने पुलिस पर मिलीभगत कर वीरू के विरुद्ध हत्या के प्रयास का झूठा केस बनाने का आरोप भी लगाया। वहीं, सीएसपी जयंत राठौर और कोलार थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा पर केस नहीं बनाने के लिए 20 हजार रुपए मांगने का आरोप भी लगाया।
इस दौरान अपर कलेक्टर विकास मिश्रा ने परिजनों से बात की। परिजनों ने उन्हें ज्ञापन देकर मामले की न्यायिक जांच कराने, सीएसपी और टीआई को हटाने, वीरू की पत्नी को सरकारी नौकरी देने की मांग रखी। अपर कलेक्टर ने उनको सात दिन में मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया।
एक घंटे तक ट्रैफिक रहा बाधित
चक्काजाम, ललिता नगर से बीमाकुंज के बीच करीब एक घंटे तक ट्रैफिक बाधित रहा। हालांकि, पुलिस ने ट्रैफिक को डायवर्ट किया। यहां शाम को वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है। इसके कारण विनीतकुंज से बीमाकुंज के बीच और दूसरी तरफ नयापुरा से ललिता नगर के बीच वाहनों की कतारें लगी रहीं।
पत्नी और मां ने कहा- वीरू को जेल में किया प्रताड़ित
वीरू की पत्नी दीपा और मां ममता राठौर ने बताया कि बुधवार को हमीदिया अस्पताल से वीरू को भर्ती करने की सूचना मिली। अस्पताल पहुंचने पर वीरू ने उनसे कहा था कि उसे जेल में प्रताड़ित किया गया है। यदि वह फिर जेल गया तो मर जाएगा। ममता ने बताया कि वीरू के शरीर पर मारपीट के निशान मिले हैं। इस मामले की न्यायिक जांच होना चाहिए। अपर कलेक्टर मिश्रा ने कहा है कि वीरू के परिजनों के आरोपों की जांच कराई जाएगी।
कौन था वीरू
17 अगस्त 2014 को 30 वर्षीय वीरू और उसके तीन अन्य साथियों के खिलाफ कोलार पुलिस ने गेहूंखेड़ा निवासी खातून बी की शिकायत पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया था। खातून बी ने हाथ में गोली मारने का आरोप लगाया था।
इसके बाद पुलिस ने 20 अगस्त को वीरू और उसके साथियों को गिरफ्तार कर जेल पहुंचा दिया था। इसमें उसके तीन साथियों को जमानत मिल गई थी। बुधवार को वीरू की कोर्ट में पेशी थी, लेकिन उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे जेल से हमीदिया अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया। वीरू ठेकेदारी का काम करता था।