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डाउनलोड करेंभोपाल/जबलपुर। हाईकोर्ट ने नर्मदा कर मामले की सुनवाई के दौरान शुक्रवार को राज्य शासन पर प्रति याचिका एक हजार रुपए का जुर्माना (कॉस्ट) लगाया है। अब सरकार को क्रेडाई, निजी कॉलोनाइजरों और बिल्डर्स द्वारा दायर सभी 11 याचिकाओं पर यह जुर्माना भरना होगा। एक्टिंग चीफ जस्टिस केके लाहोटी और जस्टिस सुभाष काकड़े की युगलपीठ ने यह जुर्माना इसलिए लगाया, क्योंकि दो सप्ताह की आखिरी मोहलत के बाद भी सरकार की ओर से जवाब पेश नहीं हुआ।
भोपाल नगर निगम की अनुशंसा पर नगरीय प्रशासन विभाग ने एक आदेश पारित किया था। इसके मुताबिक 24 सितंबर 2012 से भवन निर्माण की अनुमति लेने से पूर्व आवेदन देने वाले को अनिवार्य रूप से नर्मदा कर देना होगा। इसी आदेश के तहत भोपाल नगर निगम ने याचिकाकर्ताओं के खिलाफ मांगपत्र जारी कर दिए, जिसके खिलाफ यह याचिका दायर की गई थी।
दो हफ्ते की आखिरी मोहलत के बाद शुक्रवार को हुई सुनवाई में भी सरकार जवाब पेश न कर सकी। याचिकाकर्ता की ओर से सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने पैरवी करते हुए तर्क दिया कि नगर निगम कर की वसूली के लिए लगातार मांगपत्र जारी कर रहा है और बिल्डिंग परमिशन रोक रहा है। लेकिन दूसरी ओर कोर्ट में जवाब देने में देरी कर रहा है। गुप्ता के तर्कों पर कोर्ट ने राज्य शासन को फटकार लगाई। अगली सुनवाई गर्मी की छुट्टी के बाद होगी।
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