भोपाल. को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी में गड़बड़ी के शिकार लोगों की सुनवाई अब राजधानी में खुले मंच के जरिए होगी। इसमें सालों से पेंडिंग मामले शामिल किए जाएंगे। आयोजन में जिले के प्रभारी मंत्री सहित कलेक्टर अौर सहकारिता विभाग के अफसरों की मौजूदगी में मामलों का निराकरण किया जाएगा। आयोजन में पीड़ित पक्ष और संबंधित सोसायटी के संचालक मंडल को भी बुलाया जाएगा।
हाउसिंग सोसायटियों में गड़बड़ियों की लगातार आ रही शिकायतों का मामला सोमवार को जिला योजना समिति की बैठक में सामने आने के बाद प्रभारी मंत्री गोपाल भार्गव ने इसकी विशेष सुनवाई करने का निर्णय लिया है। उपायुक्त सहकारिता आरएस विश्वकर्मा ने बताया कि उन्हें श्री भार्गव के निर्देश मिल चुके हैं। फिलहाल खुला मंच की तारीख तय नहीं की गई है।
कलेक्टोरेट और थानों में रोज चक्कर काटते हैं लोग
हाउसिंग सोसायटी में प्लॉट देने के नाम पर ठगी के शिकार लोग रोजाना थानों और कलेक्टोरेट के अफसरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिल रहा है। खुद अफसर भी मानते हैं कि अनेक सोसायटी में प्लाॅट देने के नाम पर बीते सालों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं।
20 करोड़ में बेच दी शाॅपिंग काॅम्प्लेक्स की छत
गणेश गृह निर्माण सहकारी संस्था के संचालक मंडल के सदस्य ने जनसुनवाई में शिकायत की है कि सोसायटी के शाॅपिंग काॅम्प्लेक्स भवन की छत 20 करोड़ रुपए में बेच दी गई है। इसके लिए साधारण सभा की बैठक भी नहीं बुलाई गई और न ही संचालक मंडल की बैठक में इस आशय का प्रस्ताव हुआ।
श्रीराम काॅलोनी निवासी केपी सिंह का आरोप है कि सोसायटी के शाॅपिंग काॅम्प्लेक्स भवन की छत को बेचने की उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई, जबकि वह संस्था के संचालक मंडल के सदस्य हैं। कलेक्टर ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
20 साल से नहीं मिला प्लॉट
सर्वधर्म हाउसिंग सोसायटी के ई-सेक्टर के 417 सदस्य 20 साल से प्लॉट पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। उनके प्लॉट सोसायटी के संचालक व पदाधिकारियों ने बेच दिए हैं। संस्था की 39.02 एकड़ में से सिर्फ 2.15 एकड़ जमीन ही बची है। 27.37 एकड़ जमीन बेच दी गई है। रमेश वंजारी ने 1995 में 45 हजार रुपए देकर संस्था से 1800 वर्ग फीट का प्लाट खरीदा था, लेकिन सोसायटी ने आज तक उसकी रजिस्ट्री नहीं कराई है।
एक प्लाॅट की दो रजिस्ट्री
पेरिस हाउसिंग सोसायटी से निर्मला अग्रवाल ने साल 1998-99 में 1000 वर्गफीट का प्लाॅट खरीदा था। 2008-09 में उन्हें पता चला इस प्लॉट की रजिस्ट्री किसी और के नाम कर दी गई है। सोसायटी के छह अन्य सदस्यों के प्लॉट की रजिस्ट्री भी किसी अन्य के नाम कर दी गई। निर्मला पिछले पांच साल से कोर्ट के चक्कर काट रही हैं।
शिकायतें कैसी कैसी
>एक ही प्लॉट की एक से ज्यादा रजिस्ट्री >वरिष्ठ सदस्यों को प्लॉट न देकर दूसरों के नाम करा दी रजिस्ट्री >शुल्क लेकर भी नहीं कराए विकास कार्य >सोसायटी का रिकॉर्ड ही गायब >बिल्डरों को बेच दी सोसायटी की जमीन।