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डाउनलोड करेंभोपाल. केंद्र हो या फिर राज्य सरकार, आईएएस और आईपीएस अफसरों को दो साल से पहले किसी भी पद से नहीं हटा पाएंगी। केंद्रीय कार्मिक और प्रशिक्षण मंत्रालय (डीओपीटी) ने अखिल भारतीय सेवा के अफसरों की पोस्टिंग के संबंध में नए नियम लागू कर दिए हैं। इनके मुताबिक दो साल से पहले इन सेवाओं के अफसरों को हटाना है तो इसका निर्णय राज्य स्तरीय सिविल सेवा बोर्ड करेगा। राज्य सरकारों से कहा गया है कि जल्दी से जल्दी बोर्ड का गठन करें। नियमों के दायरे में आईएफएस (वनसेवा) अफसरों को भी रखा गया है।
डीओपीडी सूत्रों की मानें तो उप्र में अखिलेश सरकार द्वारा आईएएस अफसर दुर्गा शक्ति को निलंबित किए जाने के बाद केंद्र ने अखिल भारतीय सेवा के अफसरों के लिए लागू नियमों में संशोधन करने के निर्देश दिए थे। ताकि इनके ट्रांसफर राजनैतिक दबाव में ना किए जा सकें। इस मंशा को ध्यान में रखकर डीओपीटी में नियम संशोधित किए गए हैं। जब तक हटाने का ठोस कारण न हो, अफसर को एक पद पर कम से कम दो साल तक काम करने का मौका मिलेगा।
इन अफसरों की पोस्टिंग और ट्रांसफर के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय सिविल सेवा बोर्ड का गठन होगा। यह पोस्टिंग की सिफारिश राज्य सरकार से करेगा। हालांकि सक्षम अधिकारी ठोस कारण देकर बोर्ड की अनुशंसा को ख़ारिज कर सकता है। बोर्ड हर तीन माह में केंद्र सरकार को एक रिपोर्ट भी भेजेगा। जिसमें उन अफसरों के संबंध में पूरा विवरण होगा, जिन्हें फिक्स्ड टर्म से पहले हटाने की सिफारिश की गई है।
कौन होगा बोर्ड में
आईएएस के लिए मुख्य सचिव अध्यक्ष, वरिष्ठतम अपर मुख्य सचिव या राजस्व मंडल का अध्यक्ष या इसी रेंक का अधिकारी सदस्य और प्रमुख सचिव/सचिव कार्मिक सदस्य सचिव होंगे। जबकि आईपीएस के लिए डीजीपी और गृह विभाग के प्रमुख सचिव अथवा सचिव और आईएफएस के लिए पीसीसीएफ और वन विभाग के प्रमुख सचिव अथवा सचिव भी सदस्य होंगे।
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