भोपाल. तारीख- 10 दिसंबर। स्थान-पिपलानी गुरुद्वारे के पास। समय- रात करीब पौने नौ बजे। पिपलानी थाने का एएसआई भारत सिंह तोमर वहां प्रॉपर्टी डीलर विजय श्रीवास्तव और उसके पार्टनर मुनीश कुमार मलिक के साथ खड़ा हुआ था। उन्हें टीआई सुबोध कुमार सिंह तोमर का इंतजार था।
कुछ ही देर में टीआई थाने की जीप ड्राइव करते हुए वहां पहुंचे। श्रीवास्तव ने अपने पास छिपा ऑडियो रिकॉर्डर ऑन कर दिया। शुरुआती बातचीत के बाद टीआई मुद्दे पर आ गए। श्रीवास्तव को धमकाने के अंदाज में बोले ‘तुम्हारे काम ही ऐसे हैं। तुम जमीन विवाद में उलझे हुए हो। वो तो मुनीश बीच में है, इसलिए मैं मदद कर भी रहा हूं। मामला सुलझाना है तो रुपए तो लगेंगे। आगे जैसा भारत सिंह बोले, वैसा-वैसा करते जाओ।’
इस बीच श्रीवास्तव लगातार बोलते रहे कि उनके खिलाफ झूठी शिकायत की गई है। उन्हें फंसाया जा रहा है, लेकिन टीआई का धमकाना जारी था। उन्होंने श्रीवास्तव से कहा ‘तुम जमीन के मामले में उलझ गए हो, कोई रास्ता भी नहीं है। मामले में बचना चाहते हो तो पांच लाख रुपए लगेंगे।’
करीब 10 मिनट की बातचीत की रिकॉर्डिंग श्रीवास्तव ने लोकायुक्त पुलिस को दी। इस रिकॉर्डिंग के आधार पर टीआई और एएसआई के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया। शनिवार को एएसआई को उस समय पकड़ लिया गया, जब वह मुनीश से रिश्वत की पहली किस्त के तौर पर एक लाख रुपए ले रहा था।
दूसरे दिन भी नहीं हुई गिरफ्तारी
आरोपी पिपलानी टीआई तोमर को लोकायुक्त पुलिस दूसरे दिन भी गिरफ्तार नहीं कर सकी। रविवार को तोमर पुलिस लाइन में रिजर्व ड्यूटी पर रहे। उन्हें शनिवार को लाइन अटैच कर दिया गया था।
भनक लग गई थी
बताया गया है कि एएसआई को इस बात की भनक लग गई थी कि लोकायुक्त पुलिस की टीम उसकी घेराबंदी कर रही है। यही कारण था कि वह सीधे विजय से रुपए नहीं ले रहा था। उसने मुनीश मलिक के घर से रुपए लेने की बात की। लेकिन बाद में प्लान बदला और मुनीश को एक लाख रुपए के साथ इंद्रपुरी बुलाया गया।
भारत सिंह ने मुनीश पर नजर रखने के लिए अपने एक आदमी को बाइक से उसका पीछा करने की जिम्मेदारी भी दी थी। लेकिन भारत की प्लानिंग लोकायुक्त पुलिस के सामने चल नहीं सकी और वह रंगे हाथ पकड़ा गया था।