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दो साल में 72 करोड़ का अवैध कारोबार

7 वर्ष पहले
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भोपाल. फर्जी कमोडिटी मार्केट मामले में सीआईडी ने मंगलवार को कोर्ट में 10 हजार पन्नों का चालान पेश किया। इसमें सीआईडी ने 22 अलग-अलग धाराओं में आरोप तय किए हैं। सीआईडी ने चालान में बताया है कि दो साल के भीतर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) के जरिए 22 हजार करोड़ रुपए की ट्रेडिंग हुई। इनमें से ७२ करोड़ रुपए का अवैध कारोबार मेटाट्रेड-५ के माध्यम से किया गया है।
मेटाट्रेड-५ के जरिए जिसने भी निवेश किया, उसे धोखा ही मिला। लिहाजा, एयू कमोडिटी/मनीहाउस प्राइवेट लिमिटेड के संचालकों द्वारा लोगों से की गई धोखाधड़ी साबित होती है। सीआईडी की टीम ने दोपहर करीब १२ बजे सीजेएम पंकज सिंह महेश्वरी की अदालत में पांच आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया। इनमें सरगना अमित सोनी, उसका भाई अनुराग सोनी, स्वप्निल भट्ट, विजय सेमरे और राकेश बत्रा शामिल हैं। इस मामले में अब तक ११ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
आरोपियों ने मेटाट्रेड-५ सॉफ्टवेयर को कम्प्यूटर्स व संबंधित मोबाइल फोन पर इंस्टॉल कर इंदौर, नई दिल्ली, जयपुर और मुंबई जैसे बड़े शहरों में लोगों को ठगा है। इन शहरों में अपने दफ्तरों से इंटरनेट के जरिए एमसीएक्स के समानांतर मिनी एक्सचेंज संचालित कर अवैध कारोबार किया गया। उल्लेखनीय है कि बीती ३० अक्टूबर को फर्जी तरीके से कमोडिटी मार्केट चलाए जाने का मामला सामने आया था।
सायबर सेल ने नहीं की विधिवत कार्रवाई
भास्कर को मिले चालान में इस बात का भी जिक्र है कि सीआईडी से पहले मामले की जांच कर रही राज्य सायबर सेल ने विधिवत कार्रवाई नहीं की थी। सीआईडी सूत्रों ने बताया कि एमसीएक्स का डाटा खंगाले जाने की कार्रवाई भी जल्द शुरू की जाएगी। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने फर्जीवाड़ा एमसीएक्स के जरिए ही किया है। सीआईडी अब यह जानना चाहती है कि दो साल के भीतर हुई २२ हजार करोड़ की ट्रेडिंग में एमसीएक्स ने नियमानुसार ट्रेडिंग करवाई गई है या नहीं?
इस मामले में जब्त किए गए अन्य सर्वर, कम्प्यूटर और मोबाइल फोन की जांच फिलहाल सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (सीएफएसएल) कर रही है। इसकी रिपोर्ट आनी बाकी है।
चालान में लिखा है कि 'राज्य सायबर एवं उच्च तकनीकी अपराध, जोनल कार्यालय, इंदौर के पुलिस अफसरों द्वारा आरोपियों से संबंधित कम्प्यूटर्स की हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण व संबंधित दस्तावेज आदि इंदौर में विभिन्न स्थानों से कथित रूप से उनके वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार जमा कर राज्य सायबर एवं उच्च तकनीकी अपराध के भोपाल कार्यालय में 30 अक्टूबर 2013 को जमा कराए गए। उक्त उपकरण व दस्तावेज एकत्रित करने में विधिवत कार्रवाई नहीं की गई है।'