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कॉपी जांचने वाला प्रोफेसर ही दलाल के मार्फत छात्रों से करता था संपर्क

8 वर्ष पहले
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भोपाल. बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) में हुए बीडीएस परीक्षा फर्जीवाड़े में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने तीन और लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें ऋषिराज डेंटल कॉलेज के बीडीएस प्रथम वर्ष के छात्र इमरान मंसूरी, चंद्रप्रकाश व इसी कॉलेज के लैब टेक्नीशियन रणबहादुर पटेल शामिल हैं। जबकि पीपुल्स डेंटल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. एसवी दांगी अभी भी फरार हैं। शुक्रवार को एसटीएफ ने इनके नामों का खुलासा किया।

एसटीएफ की कार्रवाई के दौरान इस फर्जीवाड़े में एक दूसरे गिरोह के भी शामिल होने की बात सामने आई है। पहला गिरोह परीक्षा केंद्र में जहां कॉपियां लिखने में सक्रिय था, वहीं दूसरा गिरोह मूल्यांकन में हेराफेरी करता था। एसटीएफ के एआईजी कमल मौर्य के अनुसार डॉ. दांगी लैब टेक्नीशियन पटेल के माध्यम से छात्रों से संपर्क करता था। छात्रों के हां कहने के बाद उनसे पैसे की डिमांड की जाती थी। रणबहादुर दलाल की भूमिका निभाता था।

छात्रों ने रणबहादुर को पास होने के लिए पैसे देने की बात स्वीकारी है। इमरान मंदसौर, चंद्रप्रकाश आठया दमोह व रणबहादुर भोपाल का निवासी है। एसटीएफ ने पटेल के पास से एक डायरी जब्त की है, जिसमें उन छात्रों के रोल नंबर लिखे हुए हैं जिन्हें पास कराने का ठेका लिया जाता था।

अंदर व बाहर दिए गए नंबरों में भी अंतर

जांच में डॉ. दांगी द्वारा ही कॉपियों में एसबी पेंसिल से लिखे उत्तर पर नंबर देना सामने आया है। छात्र कॉपी में उत्तर लिखने वाले स्थान पर केवल तीन चार शब्द लिखकर जगह छोड़ देते थे। उस छूटी जगह पर कोई और पेंसिल से उत्तर लिखता था। मूल्यांकनकर्ता पेंसिल से लिखे उत्तर पर भी नंबर देते थे। नियमानुसार पेंसिल से लिखे उत्तर का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता है।

गिरफ्तार हुए छात्रों ने पेंसिल से लिखे उत्तर की हैंडराइटिंग उनकी होने से इंकार किया है। इसके अलावा कॉपियों के अंदर व बाहर दिए गए नंबरों में भी अंतर मिला है। इस मामले में एसटीएफ अब तक गिरोह के सरगना सज्जन सिंह परमार, समेत कुल 17 विद्यार्थियों के खिलाफ मामला बना चुकी है।

कमेटी ने अफसरों से पूछा- पर्यवेक्षकों के चयन का आधार क्या है

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में बीडीएस फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद इस मामले में हुई प्रशासनिक गलती की जांच कर रही दो सदस्यीय कमेटी ने विवि प्रशासन से पांच बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। कमेटी ने विवि प्रशासन से सतत शिक्षा विभाग को परीक्षा केंद्र बनाने के आधार से लेकर पर्यवेक्षकों के चयन की प्रक्रिया तक के बारे में पूछा है। जांच अधिकारियों ने विवि से बीडीएस परीक्षा के लिए बनाए गए केंद्र से संबंधित जानकारी मांगी है।

विवि से पूछा है कि पर्यवेक्षकों की नियुक्तिकिस नियम के तहत की गई थी। वहीं, विवि के अधिकारी जवाब देने के लिए नियम खंगालने के साथ ही दस्तावेज एकत्र करने में जुट गए हैं। विवि के अधिकारियों का कहना है कि इस जांच से उन्हें पता चलेगा कि उनसे चूक कहां हुई। जांच अधिकारी डॉ. आशा श्रीवास्तव के अनुसार कमेटी अपनी जांच रिपोर्ट एक हफ्ते में जमा कर देगी।

विश्वविद्यालय व डीएमई अनुशंसा करें तो डेंटल कॉलेजों की मान्यता निरस्त करेंगे : डॉ. मजुमदार

नसं. भोपालत्नबीयू में बीडीएस फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद शहर के निजी डेंटल कॉलेजों की मान्यता खतरे में पड़ गई हैं। जिन निजी डेंटल कॉलेजों से जुड़े छात्रों व फैकल्टी मेंबर की इस पूरे मामले में संदिग्ध भूमिका सामने आ रही है, उन कॉलेजों की मान्यता को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। कॉलेजों की मान्यता के लिए जरूरी डिजायरेबिलिटी व फिजिबिलिटी (डीएंडएफ) सर्टिफिकेट पर फैसला अब पूरी तरह डीएमई के हाथों में है।

भास्कर से चर्चा में डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (डीसीआई) के अध्यक्ष डॉ. दिब्येंदु मजुमदार ने कहा है कि यदि संबंधित विश्वविद्यालय व संचालक चिकित्सा शिक्षा (डीएमई) मामले में शामिल कॉलेजों की मान्यता निरस्त करने की सिफारिश करेंगे तो वो भी की जाएगी।

डॉ. मजुमदार शनिवार को ऋषिराज डेंटल कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे। उधर, डीएमई डॉ. एससी तिवारी ने बताया कि एसटीएफ की जांच रिपोर्ट आने के बाद जिस कॉलेज में अनियमितता सामने आएगी, उसका डीएंडएफ निरस्त करेंगे।

वहीं, बीयू रजिस्ट्रार डॉ. संजय तिवारी ने इस मामले में एसटीएफ की जांच पूरी होने तक कॉलेजों के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई से इंकार किया है।

रजिस्ट्रार का कहना है कि यह गलती परीक्षा केंद्र में हुई है। कॉलेजों से जुड़े कुछ लोगों के इसमें शामिल होने से पूरे कॉलेज को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।