भोपाल. राजधानी में प्रस्तावित लाइट मेट्रो ट्रेन के लिए खर्च होने वाले करीब 21,000 करोड़ रुपए की भरपाई के लिए राज्य शासन ने प्लान तैयार किया है। इसके तहत सरकार, भोपाल में अपनी जमीन को बेचेगी। साथ ही रूट के दोनों तरफ 500 मीटर दूरी तक आने वाली प्रॉपर्टी में चार गुना से ज्यादा अतिरिक्त निर्माण भी करने की इजाजत भी देगी।
अतिरिक्त निर्माण पर कलेक्टर गाइडलाइन के हिसाब से रकम वसूली जाएगी। इसका उपयोग मेट्रो के निर्माण में होगा। इससे मेट्रो के सभी छह रूटों की कुल 80 किमी की लंबाई में दोनों तरफ भविष्य में हाईराइज इमारतें नजर आएंगी।
कैबिनेट ने मप्र मेट्रो रेल लिमिटेड कंपनी का गठन करते हुए मेट्रो ट्रेन की डीपीआर में प्रोजेक्ट की लागत की व्यवस्था वाले प्रावधानों को मान लिया है। इसके तहत राज्य सरकार पूरे प्रोजेक्ट को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) पर ले जाएगी। प्रोजेक्ट लेने वाली कंपनी को लागत की वसूली व मुनाफे के लिए डीपीआर तैयार कर रही रोहित एसोसिएट ने आठ तरीके बताए हैं।
पहले तरीके में निर्माण कंपनी को करीब एक हजार एकड़ जमीन डिपो या स्टेशन के आसपास अलग-अलग टुकड़ों में दी जाएगी। यहां कंपनी अपना प्रोजेक्ट लगाकर रकम की व्यवस्था करेगी। इस जमीन के लिए सरकार ने कलेक्टर से जमीन और प्रॉपर्टी की रिपोर्ट मंगाई है। नगरीय विकास एवं पर्यावरण मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि हमने डीपीआर में अन्य चीजों का क्रियान्वयन शुरू कर दिया है। इसके लिए नियमों में बदलाव भी होगा।
एफएआर बढ़ जाएगा
लाइट मेट्रो रूट के दोनों ओर अतिरिक्त निर्माण के लिए एफएआर बढ़ाया जाएगा। यह सभी जगह 5 तक हो जाएगा। अभी अरेरा कॉलोनी में यह 0.75 और पुराने शहर में 2 तक है। औसत एफएआर 1.25 है।
एक मेजर और एक माइनर डिपो बनाया जाएगा
डीपीआर बनाने वाली कंपनी ने लाइट मेट्रो के लिए एक मेजर और एक माइनर डिपो की जरूरत बताई है। मेजर डिपो के लिए 50 एकड़ और माइनर डिपो के लिए 20 से 25 एकड़ जमीन की जरूरत है। जमीन के लिए कंपनी ने जिला प्रशासन को 12 इलाके सुझाए हैं, जिनमें से दो इलाकों में जमीन की उपलब्धता की जानकारी प्रशासन देगा। इसके बाद यहां कंपनी डिपो का एस्टीमेट तैयार कर इसे डीपीआर में शामिल करेगी।
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