(पाकिस्तान की मलाला यूसुफजुई के साथ बैठे कैलाश सत्यार्थी।)
विदिशा. विदिशा में जन्मे कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की मलाला यूसुफजुई को बुधवार को नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया। नोबेल पुरस्कार वितरण समारोह से पहले हुई प्रेस कांफ्रेंस में मलाला और कैलाश पत्रकारों से बात कर रहे थे। दोनों को इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार मिला है। कैलाश के बचपन बचाओ आंदोलन ने 80,000 से ज्यादा बच्चों को बाल मजदूरी के चंगुल से मुक्त किया है। वहीं, मलाला यूसुफजई पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा के लिए संघर्षरत हैं।
सत्यार्थी बोले- मलाला मेरी बेटी जैसी, पिता के साथ बैठकर खुश हूं : मलाला
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और भारत के बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी ने कहा है कि 'पाकिस्तान की मलाला यूसुफजुई मेरी बेटी की तरह है। यह बहुत बहादुर बच्ची है, मैं खुशकिस्मत हूं जो उसके साथ नोबेल शेयर कर रहा हूं। अब दोनों मिलकर दुनिया के बच्चों को बेहतर भविष्य देने की कोशिश करेंगे।’ मलाला ने भी सत्यार्थी की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘मैं अपने पिता के साथ बैठ कर खुद को बहुत गौरवान्वित महसूस कर रही हूं।’
स्कूल की मांग करो...
> बच्चों को आईपैड नहीं मांगना चाहिए। उन्हें सिर्फ किताब, कलम और स्कूल की मांग करनी चाहिए।
धर्मगुरु करें शुरुआत
> अगर विश्वभर के धर्मगुरुओं को बच्चों के लिए दुनिया को बेहतर बनाना है तो पहले बच्चों से शुरुआत करें।
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