(मिस इंडिया इंटरनेशनल की रनर - अप रह चुकी है गुरलीन)
भोपाल. ‘लाइफ में कोई शार्ट-कट नहीं होता है। सक्सेस के पीछे हार्ड वर्क, डेडीकेशन होता है। कुछ पाने के लिए सैक्रिफाइस करना पड़ता है।’ यह कहना था 22 वर्षीय मिस इंडिया इंटरनेशनल-2013 गुरलीन ग्रेवाल का। वे रविवार को सी-21 मॉल में आयोजित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) के ‘एंथुजिया-2014’ में शिरकत करने भोपाल आईं थीं। इस मौके पर सिटी भास्कर से उन्होंने अपना अनुभव साझा किया...
फ्रेंड्स के कहने पर शुरू हुआ सफर
गुरलीन ने कहा, ‘मेरे पापा आर्मी ऑफिसर हैं। मुझे शुरू से डिसिप्लिन, टाइम मैनेजमेंट और हर काम को सिस्टेमैटिक ढंग से करने के बारे में बताया गया है। स्कूल टाइम में मैं सेलिब्रिटीज और मिस यूनिवर्स को देखती थी। वो मुझे काफी अट्रेक्ट करती थीं। कॉलेज में फ्रेंडस ने काफी मुझे मॉडलिंग की फिल्ड में ट्राय करने के लिए बहुत फोर्स किया। फ्रेंडस के कहने पर शुरू हुए इस सफर ने मुझे मिस दिवा में फर्स्ट रनर-अप और मिस इंडिया इंटरनेशनल-2013 का खिताब दिलाया।’
हमारे डाइट चार्ट को फॉलो न करें
‘मिस इंडिया इंटरनेशनल टाइटल जीतने के बाद लाइफ काफी चेंज हो गई है। मेरा पब्लिक अपीरियंस एज ए सेलिब्रिटी होने लगा है। मैं सभी गर्ल्स से रिक्वेस्ट करती हूं कि जो रुटीन और डाइट हम फॉलो करते हैं वो आप न करें। हमें अपने करियर और प्रोफेशन के लिए काफी सेक्रिफाइज करना पड़ता है। पहले लगता था कि ग्लैमर की चमक पाना ईजी है, लेकिन मालूम हुआ कि नेम-फेम के लिए काफी कुछ सेक्रिफाइज करना पड़ता है।’
फैमिली ने हमेशा साथ दिया
मेरी फैमिली ने हमेशा से मेरा साथ दिया है। मेरे मम्मी-पापा को हमेशा मुझ पर विश्वास था, जिसके कारण मैं हर स्टेज को सक्सेसफुली क्लियर करती गईं।
अभी एक्टिंग के बारे में नहीं सोचा
अभी ग्रेजुएशन कंप्लीट किया है। मिस इंडिया का कॉन्ट्रेक्ट भी चल रहा है। मम्मी चाहती हैं कि आगे पढ़ाई करूं। इसलिए अभी फिल्मों में आने का कोई प्लान नहीं है।
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