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सास की ख्वाहिश-आखिरी सांस तक साथ रहें चारों बहुएं

8 वर्ष पहले
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भोपाल। 86 साल की संपत बाई अग्रवाल महिला थाने पहुंचीं, बहू-बेटों की शिकायत लेकर नहीं बल्कि बिखरे परिवार को मिलाने की आस लेकर। इच्छा है जीवन के आखिरी पड़ाव में चारों बहू-बेटे उनके साथ रहें। घर में एक ही चूल्हा जले। तीन बहुएं साथ रहने को राजी हैं। सबसे बड़ी बहू ने थोड़ा वक्त मांगा है।

महिला थाना प्रभारी सोनाली सूना का कहना कि महिला थाने में अपनी तरह का यह पहला मामला है। शाहजहांनाबाद में रहने वाली इस बुजुर्ग महिला के पति गल्ला व्यवसायी थे। उनके चारों बेटे पुश्तैनी कारोबार संभाल रहे हैं। तीन बहू-बेटे अलग-अलग रह रहे हैं। छोटा बेटा व बहू उनके साथ हैं। संपत बाई का कहना है कि चारों बेटे तो एक साथ रहना चाहते हैं, लेकिन बहुएं ऐसा नहीं चाहतीं। वे चाहती हैं कि जब उनकी आखिरी सांस निकले तब पूरा परिवार एक साथ रहें। इसी उम्मीद के उन्होंने आवेदन दिया था।

बस! बड़ी बहू हां कर दे : काउसंलर आफताब अहमद ने बहुओं और बेटों से बात की। बेटों का कहना था कि वो किसी भी प्रकार का झगड़ा नहीं चाहते थे। परिवार में शांति की खातिर अलग-अलग रह रहे हैं, लेकिन चारों एक साथ पुश्तैनी कारोबार संभाल रहे हैं। उनकी इच्छा भी साथ रहने की ही है। तीन बहुएं तो मान गईं हैं लेकिन बड़ी बहू जिद पर अड़ी है।

हालांकि तीनों देवरानियों ने अपनी जेठानी को मनाने की कोशिश की और उनकी हर शर्त मानने तैयार हो गई हैं। महिला थाना प्रभारी का कहना है कि बड़ी बहू की बातों से भी लग रहा है कि काउंसलिंग सफल होगी।

बड़ी बहू बोली- सोचने का वक्त दीजिए

मैंने शादी के बाद 22 साल सबकी सेवा की। जब देवरानियों के काम करने का वक्त आया तो सब ने साथ छोड़ दिया। हम अम्मा का सम्मान करते हैं, लेकिन हमें विचार करने कुछ वक्त चाहिए।- अनिता अग्रवाल (बड़ी बहू)

छोटी बहुओं ने कहा-बच्चे भी अलग रहकर दुखी हैं

गलतियां सबसे होती हैं। हमसे भी हुई। हम लोग भूल गए थे कि जहां चार बर्तन होते हैं तो आवाज तो होती ही है। बच्चे भी अपने चाचा-ताऊ के बच्चों से अलग होकर दुखी हैं। हम तो अम्मा के साथ रहने को तैयार हैं, बस बड़ी दीदी तैयार हो जाएं।- चंद्रा, दीप और सोनी अग्रवाल (छोटी बहुएं)