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डाउनलोड करेंबचपन में जब हम शून्य की तरफ देखकर हंसते हैं तो होठों पर, बस्ता उठाते हैं तो पीठ पर, रोते हैं तो जहां लुढ़ककर आंसू आते हैं उन गालों पर मां ही होती है। ...और जब शादी होती है तो दरवाजे पर भी, जीवन संघर्ष में थकते वक्त हर कदम पर सुकून की छाया मां ही होती है। युग बदलते हैं, स्थान बदलते हैं, लोग बदलते हैं, सब कुछ बदलता है। कभी नहीं बदलती तो वह है सिर्फ मां। वह तो एक है पर उसकी शख्सियत विराट है और उसके पहलू अनगिनत हैं।
रणभूमि हो या खेल का मैदान, नहीं छोड़ा बेटे का साथ
बेटा पीठ पर ले खूब लड़ी झांसी की रानी
1857 के स्वतंत्रता संग्राम में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई अपने बेटे दामोदर को पीठ पर बांधकर युद्ध मैदान में कूद पड़ी थी। अंग्रेजों से लड़ीं। देश के लिए। और वीरगति को प्राप्त हुई। बेटे को खरोंच तक न लगने दी।
अगली तस्वीरों में देखिए बच्चों के प्रेम में किस तरह मां न्योछावर कर दी अपनी जिन्दगी...
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