पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Opposition Leader, Avdeshanand Maharaj, Polictical News

ये मेरा आखिरी आयोजन है और कहकर दुनिया को अलविदा कह गए \'महाराज\'

8 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

बारह दिन पहले तीन मई को छपरा में स्वामी अवधेशानंद महाराज के प्रवचन में मेरी उनसे मुलाकात हुई। हम दोनों ने साथ में स्वामी जी से मुलाकात की। उस समय उन्होंने एक ऐसी बात कही जो मुझे विचित्र लगी। वे बोले-'यह मेरा आखिरी आयोजन है इसके बाद कोई आयोजन नहीं करूंगा। मैंने उनकी बात का जवाब तो नहीं दिया, लेकिन अब लगता है शायद उन्हें मृत्यु का पूर्वाभास हो गया था। ठाकुर हरवंश सिंह से मेरी पहली मुलाकात 1977 में दाऊ (मेरे पिताजी स्व. अर्जुन सिंह जी) के चुनाव में हुई। वे दाऊ के चुनाव में कई बूथों की जिम्मेदारी संभालते थे।

1988 में जब दाऊ ने मुख्यमंत्री रहते हुए खरसिया से चुनाव लडऩे का मन बनाया तो हरवंश सिंह जी सहमत नहीं थे। उन्होंने दाऊ से कहा कि भले यह सीट सुरक्षित नजर आती हो, लेकिन आपको अपना क्षेत्र छोड़ कर चुनाव लडऩे की रिस्क नहीं लेना चाहिए। दाऊ ने जवाब दिया कि एक मुख्यमंत्री के नाते मैं प्रदेश के किसी आदिवासी अंचल का प्रतिनिधित्व करना चाहता हूं, ताकि यह एक नजीर बन सके।

यही नहीं दाऊ ने उनसे कहा कि खरसिया चुनाव के संचालन की जिम्मेदारी भी आपको संभालना पड़ेगी। फिर हरवंश सिंह जी ने दिन रात वहां मेहनत की। जब मैं पहली बार विधायक बना तो उन्होंने मुझे सीधी जिला सेवादल का अध्यक्ष बनाया। कहा यह ट्रेनिंग सच्ची ट्रेनिंग है। दाऊ के साथ उन्होंने सेवादल को मजबूत करने के कई प्रयास किए। उनके प्रयासों से जगह-जगह प्रशिक्षण शिविर होते थे। वे सेवादल प्रशिक्षण अकादमी बनाना चाहते थे। उनकी यह इच्छा अधूरी रह गई। उनके इस सपने को मैं पूरा करूंगा।
(लेखक राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं।)

सबको साथ लेकर चलते थे

प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित शोक सभा में नेताओं ने कहा कि हरवंश सिंह सबको साथ लेकर चलने वाले नेता थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी की मौजूदगी में हुई श्रद्धांजलि सभा में कहा गया कि राजनीति और जनसेवा के क्षेत्र में उनका दीर्घकालीन और असाधारण योगदान अविस्मरणीय रहेगा।

प्रदेश कांग्रेस के संगठन प्रभारी सचिव शांतिलाल पडियार ने उनके राजनीतिक सफर के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। इस मौके पर मीडिया विभाग के अध्यक्ष मानक अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजीव सिंह, आभा सिंह, महामंत्री सुनील सूद, डॉ. तनिमा दत्ता, प्रभारी सचिव कैप्टन जयपाल सिंह, निगम अध्यक्ष कैलाश मिश्रा, प्रदेश सचिव जैरी पॉल, विकल्प डेरिया, संजय दुबे आदि मौजूद थे।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, राज्यपाल रामनरेश यादव, प्रदेश प्रभारी महासचिव बीके हरिप्रसाद,प्रदेश अनुशासन समिति के अध्यक्ष चंद्रप्रभाष शेखर और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी सहित कई नेताओं ने हरवंश सिंह के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

ज्येष्ठ पुत्र रजनीश संभालेंगे विरासत: कांग्रेस में चर्चा है कि हरवंश सिंह के बड़े बेटे रजनीश सिंह उनकी राजनीतिक विरासत संभालेंगे। रजनीश सिवनी जिले में सेवादल के मुख्य संगठक हैं।

विधायकों की वापसी कराके ही माने

पिछले वर्ष जब विधानसभा में ऐतिहासिक हंगामे के बाद कांग्रेस के दो विधायकों चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी और कल्पना परूलेकर की सदस्यता समाप्त करने का प्रस्ताव पारित हुआ तब हरवंश सिंह अकेले ऐसे नेता थे जो दोनों की बहाली के पक्ष में थे। इसके लिए उन्होंने खुद हर संभव प्रयास किए और सबसे चर्चा कर हर पक्ष को इस बात के लिए राजी किया कि दोनों की बहाली होना चाहिए। बहाली का रास्ता भी सुझाया और वे तब तक अपने मिशन में लगे रहे जब तक कि बहाली नहीं हो गई। वास्तव में हरवंश सिंह सबको साथ लेकर चलने वाले समन्वयवादी नेता थे। (जैसा विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी ने भास्कर को बताया)

विधानसभा उपाध्यक्ष के बिना संचालित हो सकता है अंतिम सत्र

रासं.भोपालत्न हरवंश सिंह के निधन के बाद इस बात के आसार हैं कि 13 वीं विधानसभा का अंतिम सत्र विधानसभा उपाध्यक्ष के बिना संचालित हो जाए। अध्यक्ष की गैर मौजूदगी में सभापति तालिका में शामिल विधायक सभापति की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। जानकारों के अनुसार विधानसभा उपाध्यक्ष का पद रिक्त होने से किसी संवैधानिक संकट की स्थिति नहीं बनती। कई बार अध्यक्ष के निर्वाचन के छह माह बाद उपाध्यक्ष का चुनाव होता है और तब तक विधानसभा की कार्यवाही भी संचालित होती है।