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अमन कॉलोनी में बवाल के लिए बाहर से बुलाए गए थे उपद्रवी

7 वर्ष पहले
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(रजीउल हसन हैदरी शिया धर्मगुरु और सैय्यद मुश्ताक अली नदवी शहर काजी, सुन्नी समुदाय)
भोपाल. करोंद की अमन कॉलोनी में गुरुवार सुबह ईरानियों पर हमले की तैयारी पहले ही कर ली गई थी। इस बवाल को अंजाम देने वाले उपद्रवी भोपाल के अलग-अलग क्षेत्रों से बुलाए गए थे। उपद्रव में घायल हुए लोगों ने 70 फीसदी से ज्यादा आरोपियों को पहले कभी देखा ही नहीं था। फरियादियों के बयान और अब तक की पड़ताल में ये जानकारी पुलिस को मिली है। पुलिस फिलहाल यह पता लगा रही है कि दूसरे क्षेत्रों से उपद्रवियों को बुलाने की योजना किसने बनाई थी?
विवाद बाद शुक्रवार को भी अमन कॉलोनी में एहतियातन पुलिस और अर्द्धसैनिक बल तैनात हैं। पुलिस की गिरफ्त में आए 33 आरोपियों में से ज्यादातर क्षेत्र से बाहर के हैं। एसपी नॉर्थ अरविंद सक्सेना के मुताबिक अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने दबिश शुरू कर दी हैं।
डेढ़ महीने के मासूम की मौत
अमन कॉलोनी में रहने वाले डेढ़ माह के मासूम की शुक्रवार की दोपहर तीन बजे मौत हो गई। उसके पिता अमजद का कहना है कि हमला हुआ तो बच्चे की मां बाहर भागी इतने में एक बम आकर घर में गिरा। इससे बच्चे को चोट आई थी। हालांकि, एसपी अरविंद सक्सेना का कहना है कि बच्चे के दिल में छेद था और उसका चिरायु अस्पताल में इलाज भी चल रहा था। मौत की वजह हिंसा में आई चोटें नहीं हैं।
पुलिस को और सतर्क रहना था : गौर
दैनिक भास्कर से बातचीत में गृहमंत्री बाबूलाल गौर ने माना है कि इस हिंसा को लेकर पुलिस को और सतर्क रहना चाहिए था। सीआईडी भी इसे लेकर पर्याप्त इनपुट नहीं जुटा पाई। इसे लेकर गृहमंत्री ने डीजीपी सुरेंद्र सिंह और अन्य पुलिस अफसरों के साथ शुक्रवार को अपने निवास पर बैठक की। वहीं, हिंसा में घायल हुईं महिलाओं ने गृहमंत्री के बंगले पर पहुंचकर मुलाकात की। अंजुमने ईरानी की कोषाध्यक्ष मिशकिल अली के अनुसार गृहमंत्री से मांग की गई है कि आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए।
पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने के साथ ही उनकी सुरक्षित वापसी भी करवाई जाए। इस पर गृहमंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाते हुए उनके प्रारंभिक इलाज कराने का भी वादा किया है।
रजीउल हसन हैदरी शिया धर्मगुरु
कारण- हमारे समुदाय में नाजायज जमीन पर धर्मस्थल नहीं बन सकता। झगड़े की असली वजह क्या है, यह पता नहीं चल सका है। एक साथ इतने लोग कैसे जुटे, यह समझ से परे है।
समाधान- कुछ लोग उकसाने का काम करते हैं। इन पर नजर रखनी होगी। अफवाहों से सतर्क रहने की जरूरत है। पुलिस प्रशासन को भी चौकन्ना रहना होगा।
अपील- दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी, ताकि वे अगली बार कोई ऐसा दुस्साहस न कर सके। यह एक इलाकाई विवाद है, इसे सांप्रदायिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।
सैय्यद मुश्ताक अली नदवी शहर काजी, सुन्नी समुदाय
कारण- पहले दिन हुए विवाद को पुलिस और जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया होता तो हालात इतनेे नहीं बिगड़ते। पुलिस के पास कुछ दिन पहले शिकायतें की गई थीं, लेकिन पुलिस ने गौर नहीं किया।
समाधान- जिन लोगों ने उत्पात किया है, या उकसाया है, हम उन्हें नहीं जानते। पुलिस छानबीन कर ऐसे लोगों को पकड़कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।
अपील- जो कुछ हुआ, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। दोनों पक्षों को बीती बातों को भूलकर आपसी सद्भाव कायम करने की कोशिशें करनी चाहिए। वहां के रहवासियों को भी चाहिए कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें।
दोनों धर्मगुरु साथ बैठे और हो गया समझौता
शुक्रवार को ताजुल मसाजिद स्थित कजियात के दफ्तर में शहर काजी सैय्यद मुश्ताक अली नदवी और शिया समुदाय के रजीउल हसन हैदरी के साथ दोनों पक्षों की बैठक हुई। जिसमें सहमति बनी कि दोनों समुदाय के लोग एक दूसरे के विरुद्ध कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं कराएंगे।