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बीडीएस की खाली सीटें भरने के लिए कॉलेज लेवल कांउसलिंग की तैयारी

7 वर्ष पहले
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भोपाल. प्रदेश के निजी डेंटल कॉलेजों को सरकारी कोटे की खाली सीटों को भरने के लिए कॉलेज लेवल काउंसलिंग (सीएलसी) की छूट देने की तैयारी चिकित्सा शिक्षा विभाग ने कर ली है। इसके लिए संचालक चिकित्सा शिक्षा ने कानून विशेषज्ञों से राय मांगी है। इसकी वजह एआईपीएमटी काउंसलिंग के बाद भी निजी डेंटल कॉलेजों में सरकारी कोटे की 90 फीसदी सीटें खाली रहना है।

यूजी काउंसलिंग कमेटी के अध्यक्ष डॉ. एनएम श्रीवास्तव के अनुसार तीसरे चरण की काउंसलिंग के बाद निजी मेडिकल कॉलेजों में सरकारी कोटे की एक भी सीट खाली नहीं रही। काउंसलिंग से सीट पाने वाले छात्र खुद की मर्जी से सीट छोड़कर न भागें, इसके लिए एडमिशन की कार्रवाई काउंसलिंग हॉल में ही पूरी कराई गई।
डेंटल कॉलेजों में स्थिति इसके विपरीत है। इसकी वजह मेडिकल की तैयारी कर रहे छात्रों का रुझान डेंटल कोर्स में कम होना है। डॉ. श्रीवास्तव के मुताबिक निजी कॉलेजों की बीडीएस सीटों को भरने के लिए उन्हें सीएलसी की अनुमति देने का प्रस्ताव बनाया है।
ताकि कॉलेज संचालक कोर्ट में राज्य सरकार को खाली सीटों के लिए जिम्मेदार न ठहरा सकें। ज्ञात हो कि प्रदेश के 11 निजी डेंटल कॉलेजों की करीब 600 सीटों पर एडमिशन, संचालक चिकित्सा शिक्षा की यूजी काउंसलिंग कमेटी करती है।
मेडिकल की सीट छोड़ने के लिए डीएमई की अनुमति

डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि सरकारी कोटे के तहत निजी मेडिकल कॉलेज की सीट पाने वाले छात्र अब खुद की मर्जी से एडमिशन निरस्त नहीं करा सकेंगे। एडमिशन की प्रक्रिया पूरी कर चुके छात्र को प्रवेश निरस्त कराने संचालक चिकित्सा शिक्षा से अनुमति लेनी पड़ेगी।
वहीं, कॉलेज संचालक अगर सरकारी कोटे की सीट पर पढ़ रहे किसी छात्र का एडमिशन सीधे निरस्त करेंगे, तो संबंधित कॉलेज संचालक के खिलाफ कार्रवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई जाएगी। इसकी वजह निजी मेडिकल कॉलेजों की सरकारी कोटे की सीटों पर एडमिशन की प्रक्रिया समाप्त होना हैं।
जीएमसी के पांच संदिग्ध छात्र गुरुवार को होंगे बर्खास्त
खुद के स्थान पर दूसरे छात्र को पीएमटी दिलाकर गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में दाखिला लेने वाले पांच संदिग्ध छात्रों की बर्खास्तगी गुरुवार को होगी। जीएमसी डीन डॉ. बीपी दुबे ने यह निर्णय सेंट्रल फोरेंसिक लेबोरेटरी अहमदाबाद से छात्रों की प्राइमरी फोरेंसिक रिपोर्ट पर लिया है। इसमें पीएमटी 2010 के परीक्षा फार्म और एडमिशन फार्म पर चस्पा फोटो अलग-अलग होने की बात कही गई हैं। वहीं, डीन ने लेबोरेटरी डायरेक्टर से छात्रों के फोटो, दस्तखत और लिखावट की डिटेल फोरेंसिक रिपोर्ट मांगी है, जो मंगलवार तक आएगी।
जीएमसी यूजी एडमिशन कमेटी के अफसरों ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2010-11 में पढ़ रहे पांच छात्रों ने खुद के स्थान पर दूसरे छात्र को परीक्षा में बिठाया था। इसके लिए छात्रों ने व्यापमं के परीक्षा प्रवेश पत्र पर अपनी फोटो के स्थान पर दूसरे छात्र का फोटो लगाया था। पीएमटी काउंसलिंग के बाद छात्रों ने कॉलेज के एडमिशन फार्म पर स्कोरर के स्थान पर खुद के फोटो लगाकर एडमिशन लिया था।
प्रवेश पत्र और एडमिशन फार्म पर लगी फोटो में अंतर होने के कारण एडमिशन कमेटी ने इन छात्रों को संदिग्ध घोषित कर दिया था। साथ ही पांचों छात्रों के खिलाफ कोहेफिजा पुलिस थाना में परीक्षा एक्ट और धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था। इसके चलते कोहेफिजा पुलिस ने पांचों छात्रों के फोटो, फिंगर प्रिंट और दस्तखत का पता करने उनकी लिखावट का नमूना जांच के लिए सेंट्रल फोरेंसिक लेबोरेटरी अहमदाबाद भेजे थे।