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माफिया को फायदा पहुंचाने के लिए रेत की कीमतों से हटेगा सरकारी नियंत्रण

7 वर्ष पहले
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भोपाल. प्रदेश में रेत का कारोबार अब पूरी तरह रेत माफिया के कब्जे में हो जाएगा। तीन माह पहले ही रेत की कीमतों में करीब 100 रुपए प्रति घनमीटर की बढ़ोतरी करने के बाद अब इसकी दरें सरकारी नियंत्रण से बाहर की जा रही हैं।
मप्र खनिज विकास निगम ने इसका मसौदा तैयार किया है, जिसे इसी सप्ताह मंजूरी मिल सकती है। सरकारी नियंत्रण हटने से सीधे तौर पर रेत कारोबारियों को फायदा मिलेगा और वे मनमर्जी से दरें तय कर सकेंगे। ऐसे में मकान बनाना भी महंगा हो सकता है।
मसौदे में रेत की दरों को डी-कंट्रोल करने के
पीछे तर्क दिया गया है कि राज्य सरकार ने गौण खनिजों के लिए माइनिंग प्लान लागू किया है। इसके हिसाब से रेत खनन अब मात्रा (क्वांटिटी) के आधार पर होगा। अब जितनी भी नई रेत खदानों की नीलामी होगी, उसमें भी ऑफर क्वांटिटी के अनुसार बुलाए जाएंगे।
ऐसी स्थिति में ठेकेदार खदान से प्रति घनमीटर रेत उठाने की दर खुद तय करेगा। फिर रेत माफिया बाजार में उसकी बिक्री की दर तय करेंगे। अभी खदान पर रेत उठाने की दर साल भर के लिए खनिज निगम तय करता था।
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