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कलेक्टर गाइडलाइन: प्रॉपर्टी फेयर भी तय करेंगे जमीन की कीमत

7 वर्ष पहले
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भोपाल. कलेक्टर गाइडलाइन के तहत प्रॉपर्टी की कीमतें साल भर में लगे प्रॉपर्टी फेयर की कीमतों, बैंक ट्रांजेक्शन और रजिस्ट्री दस्तावेजों की रिपोर्ट के आधार पर प्रस्तावित की जाएंगी। इसके अलावा पंजीयन व राजस्व अधिकारी मैदानी सर्वे करके कीमतों के संबंध में एक अलग रिपोर्ट बनाएंगे।
दोनों रिपोर्ट के मिलान के बाद एक रिपोर्ट तैयार होगी। कलेक्टर निशांत वरवड़े का कहना है कि पिछले साल आई आपत्तियों का ध्यान रखते हुए कोशिश यही होगी कि वैज्ञानिक प्रणाली से कीमतें तय हों। शहर के किसी भी हिस्से में प्राॅपर्टी की कीमत बाजार मूल्य से ज्यादा नहीं होगी।
कलेक्टर गाइडलाइन के तहत कीमतें तय करने के लिए यह भी देखा जाएगा कि साल भर में किन-किन हिस्सों में सबसे ज्यादा प्रॉपर्टी खरीदी-बेची गई है। जिस हिस्से में ज्यादा खरीद-फरोख्त हुई है, वहां कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है। इसके अलावा शहर के बाकी हिस्सों में 10 फीसदी से ज्यादा कीमतें नहीं बढ़ाई जाएंगी। कीमतों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव देने वाले उपपंजीयक को उसका तर्क भी बताना होगा।
संभवत: अगले हफ्ते पंजीयन अधिकारियों की इस संबंध में एक बैठक होगी। इसके बाद विधिवत रूप से दिसंबर के आखिरी हफ्ते में उपमूल्यांकन समिति की बैठक की तारीख तय होगी। जिला पंजीयक शैलेष गुरु ने बताया कि पंजीयन अधिकारियों ने कीमतें तय करने के लिए अपनी तैयारी शुरू कर दी है। अब बैठक की तारीख तय होने का इंतजार है। 15 दिसंबर को पांच जिलों में ई-पंजीयन व्यवस्था शुरू होने के बाद फिर कलेक्टर गाइडलाइन की प्रक्रिया शुरू होगी।
क्या है गाइडलाइन

प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री पर लगने वाली स्टांप ड्यूटी का निर्धारण करने के लिए सरकार खुद जमीन की कीमतें तय करती है। कीमतों का निर्धारण तीन स्तर पर होता है। सबसे पहले जिला पंजीयक की अध्यक्षता वाली उपमूल्यांकन समिति कीमतें प्रस्तावित करती है। इसके बाद जिला मूल्यांकन समिति और फिर केंद्रीय मूल्यांकन समिति इसे अंतिम रूप देती है। बढ़ी हुई कीमतें एक अप्रैल 2015 से प्रभावी होगी।
अफोर्डेबल प्रॉपर्टी पर नहीं बढ़ेगी स्टांप ड्यूटी

पंजीयन अधिकारियों के अनुसार अफोर्डेबल फ्लैट्स पर स्टांप ड्यूटी बढ़ाने का विचार नहीं है। इसकी वजह यह है कि सरकार खुद अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ा रही है। बिल्डर सहित बीडीए-हाउिसंग बोर्ड के अफोर्डेबल प्रोजेक्ट इस दायरे में शामिल किए जाएंगे।
जहां खरीद-फरोख्त नहीं, वहां स्थिर रहेंगी कीमतें

गाइडलाइन में कीमतों को कम करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जाएगा। हालांकि यह आपत्तियों की सुनवाई के दौरान होगा। इससे पहले शहर के उन हिस्सों में कीमतें स्थिर रखा जाना प्रस्तावित किया जाएगा, जहां पहले से ही कीमतें ज्यादा हैं।
यहां बढ़ सकती हैं कीमतें

नीलबड़, बावड़ियाकला, कटारा, छान, दीपड़ी, समरधा, होशंगाबाद रोड व एयरपोर्ट के पास की कॉलोनियां।
हमारी कोशिश होगी कि जमीन की कीमतें बाजार मूल्य के बराबर हों। कहीं भी बाजार मूल्य से ज्यादा कीमतें प्रस्तावित नहीं की जाएंगी।'
निशांत वरवड़े, कलेक्टर